उम्रकैद काट रहे एक कैदी की शिकायत पर इन दिनों प्रदेश के डीजी जेल की जांच चल रही है। जांच भी इस बात की हो रही है कि डीजी जेल और उनके विभाग के कर्मचारी अपना काम समय से करते हैं या नहीं। कैदी की शिकायत पर चल रही जांच का नतीजा जो भी आए, लेकिन इन दिनों प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में यह शिकायत चर्चा का विषय बनी हुई है।
चंबा जिले की सिहुंता तहसील निवासी रगील सिंह पिछले 9 साल से प्रदेश के धर्मशाला मुक्त कारागार में हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहा है। कुछ समय पहले रगील ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कारागार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लेटलतीफी की शिकायत कर दी।
आरोप लगाया कि उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी को साल में दो बार 42-42 दिन की पैरोल देने का नियम होने बावजूद साल में एक बार भी पैरोल मुश्किल से मिल पा रही है। बताया कि उसने खुद जून 2015 में पैरोल के लिए आवेदन किया था, लेकिन दिसंबर महीने तक उसकी छुट्टी जारी नहीं हुई।
इसकी वजह से उसको कृषि कार्य करने में दिक्कत पेश आ रही है। कैदी ने विभाग की इस लेटलतीफी के लिए सीधे तौर पर महानिदेशक कारागार को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कैदी की शिकायत को मुख्य सचिव ने गृह विभाग में जांच के लिए भेज दिया है।