फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिमला: फूलगोभी के दाम गिरे, मुफ्त बांटने और पशुओं को खिलाने के लिए मजबूर किसान

Tue, 11 May 2021 05:00 AM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला

सार

ठियोग के टियाली निवासी सुदेश कुमार सोमवार को फूलगोभी के 12 बोरे बेचने के लिए ढली मंडी लाए। उनकी गोभी मंडी में 5 रुपये 50 पैसे प्रति किलो के दाम पर बिकी। सुदेश ने बताया कि एक किलो गोभी के उत्पादन पर लागत करीब 10 से 12 रुपये आ जाती है। 
विज्ञापन
शिमला में के दाम गिरे। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सब्जी उत्पादकों पर कोरोना की मार लगातार पड़ रही है। देश के बड़े राज्यों में लगाए गए कर्फ्यू और लॉकडाउन के कारण फूलगोभी की डिमांड घटने से सब्जी उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सोमवार को शिमला की ढली मंडी में फूलगोभी 3 से 6 रुपये प्रति किलो के थोक भाव पर बिकी।

विज्ञापन


गोभी बेचने आए किसानों ने बताया कि उत्पादन पर प्रति किलो लागत ही करीब 10 से 12 रुपये आ रही है। मंडी में गोभी बेचने पर नुकसान हो रहा है। लोगों को मुफ्त गोभी बांटेंगे, जो बच जाएगी उसे पशुओं को खिलाना पड़ेगा। ठियोग के टियाली निवासी सुदेश कुमार सोमवार को फूलगोभी के 12 बोरे बेचने के लिए ढली मंडी लाए।

उनकी गोभी मंडी में 5 रुपये 50 पैसे प्रति किलो के दाम पर बिकी। सुदेश ने बताया कि एक किलो गोभी के उत्पादन पर लागत करीब 10 से 12 रुपये आ जाती है। अभी खेतों में करीब 150 बोरे गोभी और बची है, मंडी में बेचने पर नुकसान हो रहा है। अब लोगों को बोलेंगे खेतों से मुफ्त गोभी ले जाओ, उसके बाद जो बचेगी वो पशुओं को खिला देंगे। सुदेश ने बताया कि हर साल करीब 800 से 1000 बोरे गोभी का उत्पादन करते हैं।
विज्ञापन


पिछले साल 10 से 15 रुपये प्रति किलो दाम मिल गया था, लेकिन इस साल बहुत बुरे हाल हैं। ठियोग के शलाईना गांव निवासी सोहन लाल का कहना है कि गोभी का उत्पादन घाटे का सौदा बनता जा रहा है।  पिछले साल के मुकाबले इस साल बीज और दवाओं की कीमत बढ़ गई है। गोभी की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले खाली बोरे का रेट भी करीब 5 रुपये बढ़ गए है। गाड़ी का भाड़ा भी बढ़ गया है।

किसान और कारोबारी दोनों को नुकसान : हरीश
ढली मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश ठाकुर का कहना है कि गोभी की कीमतें न बढ़ने से किसानों के साथ कारोबारियों को भी नुकसान हो रहा है। लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण डिमांड में कमी आई है। गोभी की कीमतों में चल रही मंदी को लेकर प्रदेश सरकार को अन्य राज्य सरकारों से बात कर किसानों को राहत देने के लिए कोई व्यवस्था करनी चाहिए। एपीएमसी चेयरमैन के माध्यम से भी हम यह मांग उठाने जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें