नई व्यवस्था लागू होने से मरीजों को अपने नजदीकी अस्पतालों में ही उपचार मिल सकेगा। इसके लेकर अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। जिसमें डायलिसिस मशीनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की तैनाती, आवश्यक उपकरणों और अन्य संसाधनों की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए कि जिन अस्पतालों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर डायलिसिस सेवाएं शुरू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि आदर्श अस्पतालों में डायलिसिस सेंटर शुरू होने से मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा और गंभीर किडनी रोगियों को समय पर उपचार मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के लोगों को उनके जिले या नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। विभाग जल्द ही इस योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा को अंतिम रूप देकर आवश्यक प्रक्रिया शुरू करेगा। स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर फोक्स किए हुए हैं। मरीजों को घर द्वार पर चिकित्सा सुविधा देने की पहल की जा रही है। मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही है। आदर्श अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज है।