इसके बाद सरकार ने 39 नई पंचायतों के गठन को मंजूरी दी। 84 नई पंचायतों को लेकर भी सरकार ने जनता से आपत्ति और सुझाव मांगे हंै। अब 68 नई पंचायतें बनाने का और निर्णय लिया गया है, जिससे प्रदेश में पंचायतों की संख्या और बढ़ सकती है। नई पंचायतों के गठन से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। लोगों को अपने गांव के नजदीक पंचायत स्तर पर ही कई सुविधाएं और योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। साथ ही विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन भी अधिक प्रभावी ढंग से हो पाएगा।
इसके अलावा राज्य में करीब 250 पंचायतें ऐसी हैं, जहां पिछले दो से तीन कार्यकाल से प्रधान पद महिलाओं या विभिन्न आरक्षित वर्गों के लिए आरक्षित रहे हैं। राज्य सरकार ने इस बारे में प्रारंभिक आंकड़े जुटाने के बाद इन्हें अनारक्षित करने का निर्णय लिया है। लोगों के आवेदन के बाद प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की और आगामी पंचायत चुनाव में आरक्षण से बाहर करने का फैसला लिया है।
प्रदेश सरकार के पास 50 ऐसे आवेदन भी आए हैं, जिनमें सीट अनारक्षित करने की बात कही गई है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में जल्द ही पंचायत चुनाव होने हैं और इसके लिए सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग तैयारियों में जुटे हुए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज विभाग को 20 मार्च तक नई पंचायतें बनाने की प्रक्रिया को पूरा करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार राज्य में 31 मई से पहले पंचायत चुनाव करवाए जाने हैं। ऐसे में आरक्षण और रोस्टर को लेकर विभाग तेजी से प्रक्रिया पूरी करने में लगा हुआ है। सरकार के इस फैसले को पंचायत स्तर पर प्रतिनिधित्व में संतुलन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सभी वर्गों के लिए समान अवसर वाली बनेगी।