इसके दो या तीन दिन बाद उन्हीं सीढ़ियों पर हजारों की संख्या में जनता बैठेगी। सीढ़ियों के ऊपर एक पेड़ गिरने की कगार पर है। इस सारे घटनाक्रम पर अफसर, ठेकेदार और भाजपा नेता अमर उजाला के सवालों से कन्नी काटने और गोलमाल जवाब देने में लगे रहे। अमर उजाला ने जब अफसरों और नेताओं का पक्ष जाना तो अंदरखाते बैक डेट में टेंडर निकालकर जान बचाने की जुगत भी शुरू हो गई है।
एक्सईएन ने माना बिना टेंडर हो रहा काम
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सुशील डढवाल ने माना कि प्रधानमंत्री की रैली के लिए पुलिस मैदान में सीढ़ियां बनाने का काम बिना टेंडर हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ कार्य अरजेंट वर्क में आते हैं जो करना जरूरी होते हैं।
डीसी संदीप कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री दौरे को लेकर कई अरजेंट वर्क करना जरूरी होते हैं। ऐसे अरजेंट वर्क को करने की औपचारिकताएं विभाग पूरी कर रहे होंगे।
विभाग के बोलने पर किया काम: ठेकेदार
पुलिस मैदान में सीढ़ियां बनाने का काम कर रहे ठेकेदार रोहित शर्मा ने बताया कि विभाग के बोलने पर काम किया जा रहा है। टेंडर काल किया गया है लेकिन इसकी तारीख याद नहीं हैं। इमरजेंसी में कई बार बिना टेंडर भी काम होता है।
धर्मशाला से पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि कहा कि पीएम दौरे को लेकर पुलिस मैदान का काम आननफानन में बिना प्लानिंग हो रहा है। सीढ़ियां धंस गईं या दुर्घटना हो गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। जब पीएम की रैली स्थल का काम ही बिना टेंडर होने लगेगा तो सरकारी व्यवस्था पर यह बड़ा सवाल लगाता है। इस कार्य की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।