रेणुका बांध परियोजना का निर्माण केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) से हरी झंडी मिलते ही शुरू हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन ने सीडब्ल्यूसी को रेणुका बांध का सलाहकार नियुक्त किया है। लिहाजा, आयोग के विशेषज्ञ ही अब रेणुका बांध का डिजाइन व ड्राइंग आदि तैयार करेंगे, जिसमें तीन सुरंगें भी शामिल हैं।
बहुआयामी रेणुका बांध परियोजना का निर्माण केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) से हरी झंडी मिलते ही शुरू हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन ने सीडब्ल्यूसी को रेणुका बांध का सलाहकार नियुक्त किया है। लिहाजा, आयोग के विशेषज्ञ ही अब रेणुका बांध का डिजाइन व ड्राइंग आदि तैयार करेंगे, जिसमें तीन सुरंगें भी शामिल हैं। करीब 7,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रेणुका बांध को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना में शामिल किया गया है। बांध प्रबंधन ने कुछ दिन पूर्व ही बांध निर्माण से जुड़े तमाम दस्तावेज रिपोर्ट सहित सीडब्ल्यूसी को सौंप दिए हैं। इसको लेकर सीडब्ल्यूसी के विशेषज्ञों की टीम शीघ्र ही रेणुका बांध स्थल का दौरा करने के बाद इसका डिजाइन व ड्राइंग आदि को तैयार करेगी।
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इसके आधार पर बांध प्रबंधन स्वयं बांध का निर्माण करेगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने में पांच से छह माह का समय लग सकता है। अगले माह आयोग के विशेषज्ञों की टीम का दौरा तय माना जा रहा है। परियोजना के निर्माण को लेकर सबसे पहले गिरि नदी के जल प्रवाह को मोड़ने के लिए 1600 मीटर लंबी तीन डायवर्शन सुरंगों का निर्माण शामिल है, जिनके निर्माण पर 504 करोड़ और इनको बंद करने के लिए 127 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। सुरंगों का निर्माण बांध प्रबंधन की पहली प्राथमिकता है। रेणुका बांध के महाप्रबंधक एमके कपूर ने बताया कि बांध निर्माण से जुड़े तमाम दस्तावेज सीडब्ल्यूसी के अधिकारियों को सौंप दिए हैं। आयोग के अधिकारी दस्तावेजों का अध्ययन करने में जुटे हुए हैं। उनकी हरी झंडी के बाद ही बांध के निर्माण का कार्य शुरू होगा।
40 मेगावाट बिजली बनेगी, दिल्ली को मिलेगा 23 क्यूमेक्स पानी
बांध निर्माण से जहां देश की राजधानी दिल्ली को 23 क्यूमेक्स स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति होगी, वहीं हिमाचल में 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। ददाहू के समीप 148 मीटर ऊंचे रॉकफिल बांध का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का 27 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंडी के पड्डल मैदान से वर्चुअल शिलान्यास कर इसके निर्माण को हरी झंडी दी है।
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1,286 से 7,000 करोड़ पहुंच गई लागत
चार दशक पहले जब रेणुका बांध के निर्माण का मामला सिरे चढ़ने लगा था तो उस दौरान परियोजना के निर्माण की लागत 1,286 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो वर्तमान में बढ़कर 7,000 करोड़ पहुंच गई।
परशुराम सागर होगा झील का नाम
बांध निर्माण के बाद विकसित होने वाली 24 किलोमीटर लंबी झील को परशुराम सागर का नाम दिया जाएगा। बांध निर्माण में हिमाचल सहित छह राज्यों हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली व राजस्थान की 10 फीसदी हिस्सेदारी है। बांध निर्माण की 90 फीसदी राशि केंद्र सरकार व शेष 10 फीसदी राशि अन्य छह राज्यों द्वारा वहन की जाएगी।