पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं के लिए विभागों की एनओसी की शर्त हटाने का निर्णय सही नहीं है।
इस फैसले से सरकार की समस्या का समाधान होने वाला नहीं है। सरकार को चाहिए कि वे बिजली उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन बना कर रखे।
उसके बाद ही फैसले ले। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली प्रोजेक्ट के अलावा आईपीएच, लोनिवि, राजस्व, मछली पालन, विद्युत बोर्ड, पर्यावरण विभाग व अन्य विभागों के भी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ऐसे में अगर इनके एनओसी न लिए जाएं तो इन विभागों के प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचेगा।
धूमल ने कहा है कि हिमाचल में 25 हजार मेगावाट जलविद्युत पैदा करने के स्रोत हैं। सरकार का ये सबसे बड़ा आय का साधन है। इसलिए सरकार का यह प्रयास रहना चाहिए कि प्रदेश में अधिक से अधिक विद्युत उत्पादन हो।
उन्होंने कहा कि जीव जंतुओं और वनस्पति बचाने के लिए जब इन पावर प्रोजेक्ट के लिए पानी मोड़ा जाएगा तो नदियों में पानी कम होगा। इसलिए नदियों में 15 फीसदी पानी रखा जाना आवश्यक है।
क्योंकि प्रदेश में ऐसे कई पावर प्रोजेक्ट रद्द हुए हैं जो मत्स्य और सिंचाई एवं स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को प्रभावित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सही है कि विद्युत उत्पादकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन समस्या का समाधान यह नहीं कि अनापत्ति प्रमाण पत्रों की शर्तों को ही समाप्त कर दिया जाए। दोनों में संतुलन बनाना जरूरी है।