हंगामे और नारेबाजी की भेंट चढ़ चुके सत्र के दौरान सरकार द्वारा पास कराए गए बिलों पर अब विपक्ष की निगाहें टेढ़ी हो गई हैं। विपक्ष का दावा है कि सरकार ने इन बिलों को सदन में पेश करने के लिए तय प्रक्रिया को नहीं अपनाया और उन्हें पास कराने में भी नियमों को अनदेखा किया गया।
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि वह इस सत्र में पास हुए हर बिल का अध्ययन कर रहे हैं और जो बिल बिना चर्चा के पास हुए हैं, उन्हें पास न कराने के लिए राज्यपाल से अपील करेंगे। तीन दिन से लगातार हंगामे के चलते सदन की कार्रवाई स्थगित होने के बाद वीरवार को धूमल ने पत्रकारों को संबोधित किया।
कहा कि यह पहली बार है, जब सरकार खुद विवाद को बढ़ावा देकर सदन की कार्रवाई नहीं चलने देना चाह रही। सूबे में गुड़िया कांड के बाद से लगातार अलग-अलग हिस्सों में बेटियों से अपराध हो रहे हैं। प्रदेश में कानून व्यवस्था सबसे खराब है, ऐसे में सब काम छोड़कर नियम 67 के तहत चर्चा करा लेनी चाहिए थी।
इसमें सरकार भी अपना पक्ष खुलकर रख सकती थी। लेकिन सरकार इस पर बात करने के बजाय गलत बयानबाजी कर रही है। पहले भाजपा विधायकों को गुंडा बताकर जानकर माहौल खराब करने का प्रयास किया गया और फिर जंगली बताया जा रहा है। बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने वित्त व विधि विभाग की आपत्तियों व टिप्पणियों को नजरंदाज कर बिलों को अपने हिसाब से पास करा लिया।
अफसरों को चेताया- गलत आदेश लागू हुए तो भुगतने को तैयार रहें
धूमल ने विधायक जयराम ठाकुर की गाड़ी का कार सवारों द्वारा पीछा किए जाने और शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर भी सरकार को घेरा। कहा कि जब प्रदेश के विधायक सुरक्षित नहीं हैं और उनकी सुनवाई नहीं हो रही तो आम लोगों का क्या हाल होता होगा यह सोचने की बात है।
धूमल यही नहीं रुके, कहा कि जिस मुद्दे पर तीन दिन से प्रश्नकाल स्थगित हो रहा, उस मुद्दे पर ही चर्चा कराकर एक बार में उसे निपटा दिया जाता तो अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हो जाती। चुटकी लेते हुए कहा कि सीएम को सदन भी जंगल सा नजर आ रहा है, यही कारण है कि यहां भी जंगलराज दिख रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने साफ किया कि सवाल किसी विधायक की सुरक्षा में चूक का नहीं है। कहा कि प्रदेश में आज हर तरफ जंगलराज है। सवाल के जवाब में कहा कि समाज विरोधी, महिला सुरक्षा विरोधी, आम जनमानस सुरक्षा विरोधी जो भी होगा और जो उनको संरक्षण देगा, हम उन सबके खिलाफ हैं।
चुनाव नजदीक आते ही धूमल के तेवर भी तल्ख हो गए हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नई सरकार सिर्फ छह महीने पुराने ही नहीं बल्कि पिछली सरकार के किसी भी आदेश का रिव्यू कैबिनेट में कर उसे निरस्त कर सकती है। आगे कहा कि गलत निर्णयों को लागू करने वाले अफसरों को भी अपनी गलतियों का खामियाजा भुगतना होगा।