पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए केंद्र सरकार पर भेदभाव के आरोप लगा रही है। कहा कि पिछले दो दिन में हुई भारी बर्फबारी से प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। बर्फबारी ने सरकार के आपदा प्रबंधन के दावों की पोल खोल दी है।
प्रदेश सरकार की नाकामी के कारण सामान्य जन जीवन बहाल नहीं हो पा रहा है। यहां जारी बयान में उन्होंने कहा कि केंद्र ने हिमाचल के विकास को पूर्व की यूपीए सरकार की तुलना में कई गुना अधिक धन उपलब्ध करवाया है। नीयत और नीति के अभाव में सरकार इसका सदुपयोग कर पाने में विफल रही है।
केंद्रीय दरों में प्रदेश के हिस्से के रूप में और 2011-12 में यूपीए शासनकाल में प्रदेश को मात्र 2060.67 करोड़ मिले थे। 2016-17 में यह राशि बढ़कर 4333.63 करोड़ हो चुकी है। केंद्रीय सहायता अनुदान और अंशदान के रूप में 2011-12 में हिमाचल को 5998.67 करोड़ मिले थे। 2016-17 में इस मद में लगभग 6800 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ प्रदेश सरकार को 12798.88 करोड़ मिले।
सरकार को 2016-17 में ही 9067 करोड़ अधिक मिले हैं। कहा कि मोदी सरकार ने प्रदेश के विशेष राज्य के दर्जे को बहाल किया है। इसे पूर्व कांग्रेस सरकार ने छीन लिया था। मोदी सरकार के इस फैसले से केंद्र की सभी योजनाओं में अब प्रदेश को 90 प्रतिशत धन अनुदान और 10 प्रतिशत दीर्घकालीन ऋण के रूप में मिलेगा। कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को 61 नए राजमार्ग दिए।
इसके तहत 3900 किमी सड़क बनेगी और लगभग 60 हजार करोड़ खर्च होंगे। इनकी डीपीआर बनाने को ही 229.60 करोड़ स्वीकृत किए हैं। चंबा, हमीरपुर और नाहन में मेडिकल कॉलेजों के लिए 600 करोड़, रेलवे विस्तारीकरण को 565 करोड़, एम्स, हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज, बद्दी में 107 करोड़ से टूल रूम, 50 करोड़ से सीआईपीईटी का केंद्र जैसी कई अन्य योजनाओं के लिए धन का प्रावधान किया है।