प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनावी शंखनाद के बाद अब भाजपा तीन सारथियों के सहारे प्रचार अभियान का पहला चरण शुरू करने जा रही है। खेमेबाजी को उभरने न देने के लिए पार्टी प्रदेश के किसी एक चेहरे को आगे रखकर चुनाव में नहीं उतरने की रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है।
पार्टी प्रदेश के तीनों वरिष्ठ नेताओं प्रेम कुमार धूमल, जेपी नड्डा और शांता कुमार को चुनाव प्रचार अभियान में तरजीह दे रही है, जबकि मुख्य चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही रहेगा। हालांकि, बतौर प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती पूरे अभियान में तीनों के साथ मुख्य भूमिका में दिखेंगे।
प्रचार अभियान के तहत सूबे के चारों संसदीय क्षेत्रों में चार रथ आएंगे। हर सांसद का जिम्मा उसके संसदीय क्षेत्र तक सीमित रखा गया है, जबकि तीनों दिग्गज प्रदेश अध्यक्ष के साथ पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार करेंगे।
सियासी समर में उतरने वाले रथों पर तीन सारथियों के अलावा भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी रहेंगे।
रणनीति के तहत इस यात्रा के दौरान प्रदेश भर में लगभग तीन सौ रैलियां और जनसभाएं किए जाने का लक्ष्य है। पार्टी सूत्रों के अनुसार नगर निगम चुनाव के नतीजे आने के अगले ही दिन चारों संसदीय क्षेत्रों के लिए प्रचार रथ रवाना हो जाएंगे।
रथ यात्रा कांग्रेस की प्रदेश सरकार को घेरने के साथ केंद्र सरकार के तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाएगी।
चूंकि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के मुख्यमंत्री पद की रेस में बताए जा रहे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार का सर्वाधिक विधानसभा सीटों वाले जनपद कांगड़ा में खासा जनाधार है।
पार्टी को ऐसी आशंका है कि प्रदेश के किसी एक चेहरे को आगे करने से दूसरे कैंप नाराज हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में प्रचार अभियान की शुरुआत ही सबको एक साथ आगे रखकर करने की रणनीति बनाई गई है।
प्रचार सामग्री पर मोदी-शाह के साथ धूमल, नड्डा और शांता का चेहरा
यूपी में तैयार हो रहे रथों के लिए प्रचार सामग्री में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ धूमल, नड्डा और शांता का चेहरा प्रकाशित होगा। प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती बतौर पद हर पोस्टर, बैनर का हिस्सा रहेंगे।
जिस संसदीय क्षेत्र में रथ दौड़ेगा, उसका सांसद केवल अपने क्षेत्र की प्रचार सामग्री में दिखेगा। केंद्रीय लीडरशिप ने पार्टी कैडर को एकजुट रखने के लिए वरिष्ठ नेताओं को बराबर तरजीह देने का निर्णय लिया है।