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प्रशांत भूषण को झटका, सरकार की हुई कुमुद सोसायटी

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जिला कलेक्टर एवं डीसी कांगड़ा सी. पालरसु ने मशहूर अधिवक्ता प्रशांत भूषण के भू-सौदे को रद करते हुए उनके कंडवाड़ी स्थित संस्थान की 6.09 हेक्टेयर जमीन को सरकार में निहित करने के आदेश दिए हैं।
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बुधवार को दिए गए इन आदेशों में कहा गया है कि प्रशांत भूषण ने धारा 118 के तहत मिली मंजूरी की शर्तों की अवहेलना की और निर्धारित दो साल की अवधि में इस जमीन पर कोई काम नहीं किया।

कलेक्टर ने तहसीलदार पालमपुर को इस जमीन का कब्जा लेने के आदेश भी दिए हैं। हालांकि देर शाम तक एचपीसीए स्टेडियम या बाबा रामदेव के साधुपुल परिसर जैसी कोई कार्रवाई प्रशासन की ओर से नहीं हुई।
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हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भूमि सुधार कानून 1972 की धारा 118 के तहत जारी प्रोसीडिंग्स के तहत बुधवार को जिला कलेक्टर अपना फैसला सुनाया।

इस केस में बहस पहले ही पूरी हो चुकी थी। कंडवाड़ी की ये जमीन कुमुद भूषण एजूकेशनल सोसाइटी के नाम है, जिसके मुखिया प्रशांत भूषण हैं।

भूषण ने 2010 में खरीदी थी निजी भूमि

प्रशांत भूषण ने पालमपुर के कमलेहड़ मोहाल में 2010 में शिक्षण संस्थान खोलने के लिए 6.09 हेक्टेयर जमीन एक स्थानीय निवासी से खरीदी थी।

राजस्व रिकार्ड में ये जमीन चाय बागीचे के नाम दर्ज थी। तत्कालीन सरकार ने पहले लैंड सीलिंग एक्ट 1972 की धारा 6-ए और 7-ए में छूट देते हुए लैंड यूज चेंज की अनुमति दी।

इसके बाद शिक्षा विभाग से मिले ईसी के आधार पर धारा 118 की मंजूरी 2 फरवरी 2010 को मिली। आरोप था कि इसके बाद के दो साल के भीतर प्रशांत भूषण ने इस जमीन का उपयोग नहीं किया।  हालांकि प्रशांत भूषण का तर्क था कि यहां संभावना नाम से एक शैक्षणिक संस्था वह चला रहे हैं।

कलेक्टर ने प्रशांत भूषण की ओर से दिए गए जवाब को नाकाफी मानते हुए इनकी जमीन को सरकार में निहित कर दिया। फैसले के बाद डीसी कांगड़ा ने इसे मीडिया को खुद ब्रीफ भी किया।
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न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे भूषण

प्रशांत भूषण की ओर से जिला कलेक्टर के सामने पेश हुए अधिवक्ता अमन जयपाल ने बताया कि बुधवार को हड़ताल के कारण वह कोर्ट में नहीं थे।

उन्हें फैसले की प्रति भी नहीं मिली है। जब कॉपी मिल जाएगी तो अगले चरण की कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। डीसी कांगड़ा सी. पालरसु फैसले के बारे में कहा कि सुनवाई के दौरान कुमुदभूषण एजूकेशन सोसाइटी संस्थान के ढांचे और गतिविधियों से संबंधित ऐसे कोई दस्तावेज कोर्ट में नहीं रख पाई, जो भूमि पर शैक्षणिक संस्थान के संचालन का प्रमाण हो।
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