हिमफेड के अध्यक्ष गणेश दत्त ने दावा किया है कि प्रदेश और केंद्र सरकार से चर्चा कर सूबे के लिए 2600 मीट्रिक टन की विशेष खेप हिमफेड के लिए उपलब्ध करवाई जा रही है, जो गुजरात कांडला पोर्ट से चल पड़ी है। इसी सप्ताह किसानों तक पहुंच जाएगी। हिमफेड सभी किसानों और बागवानों से आग्रह करता है कि वह संयम बनाए रखें। उनकी मांग जल्द ही पूरी की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में पोटाश का कच्चा माल उपलब्ध नहीं होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें बढ़ने से पूरे देश में पोटाश का संकट पैदा हो गया है। इसलिए इसकी कमी महसूस की जा रही है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल में इन दिनों पोटाश खाद का संकट पैदा हो गया है। सेब बागवानी के लिए अत्यंत उपयोगी म्यूरेट ऑफ पोटाश नामक खाद की केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय का उपक्रम इंडियन पोटाश लिमिटेड हिमाचल प्रदेश के लिए आपूर्ति करता है।
हिमफेड ने जनवरी में इसकी आपूर्ति के लिए ऑर्डर कर दिया है, पर यह अभी तक नहीं पहुंची है। पोटाश खाद के नहीं मिलने का कारण जॉर्डन, इजराइल आदि देशों से कम मात्रा में आयात करना बताया जा रहा है। सेब की कली, फूल, फल आदि के विकास के लिए यह बहुत ही उपयोगी होती है। इसे फरवरी के पहले और दूसरे सप्ताह में ही आमतौर पर सेब बगीचोें में डाला जाता है।
12:32:16 के स्थान पर भी 15:15:15 दे रहा हिमफेड
हिमफेड का यह दावा है कि हिमाचल प्रदेश में रबी के फसलों और बगीचों में आजकल उपयोग होने वाले खादों में मुख्य रूप से यूरिया, एनपीके 12:32:16, एनपीके 15:15:15 पोटाश और कैल्शियम नाइट्रेट शामिल हैं। दिसंबर 2021 से लेकर अब तक हिमफेड ने 10648.20 मीट्रिक टन यूरिया किसानों के लिए उपलब्ध करवाया है। इसकी अंतिम खेप पिछले हफ्ते ही 3,900 मीट्रिक टन खरीद कर हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में भिजवाया गया है। किसी भी कोने में यूरिया की कोई कमी नहीं है। 12:32:16 की कमी को दूर करने के लिए वैकल्पिक तौर पर हिमफेड ने 15:15:15 किसानों और बागवानों को उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है तथा इसकी खेप भी चल पड़ी है।