शिकायतकर्ता ने 2024 में गाड़ी का बीमा कराने के लिए दिल्ली निवासी से किया संपर्क, फर्जी पॉलिसी उपलब्ध करवाने का आरोप
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कंपनी की साख को नुकसान पहुंचाने का है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एजेंट बताकर वाहन का बीमा कराने के नाम पर 19 हजार रुपये लेने और कंपनी के नाम से फर्जी बीमा पॉलिसी जारी करने के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। अदालत के आदेश पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामले में आरोपी ने खुद को एक निजी इंश्योरेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए वाहन मालिक से रकम ली थी। मामला शिमला के कसुम्पटी निवासी गौरव डोगरा से जुड़ा है। अदालत में दायर शिकायत के अनुसार गौरव डोगरा ने 14 मार्च 2024 को अपनी गाड़ी का बीमा कराने के लिए दिल्ली निवासी एक व्यक्ति से संपर्क किया था। आरोपी को खुद को बीमा एजेंट बताते हुए बीमा प्रीमियम के तौर पर 19 हजार रुपये लिए। इसके बाद कंपनी के नाम से बीमा पॉलिसी भी उपलब्ध करवाई गई। कुछ समय बाद गौरव ने ऑनलाइन बीमा की स्थिति जांची तो पता चला कि वाहन का बीमा नहीं हुआ था। इस पर उन्होंने आरोपी से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत बीमा कंपनी से भी की। जांच में सामने आया कि इस नाम का कोई व्यक्ति संबंधित बीमा कंपनी का एजेंट या कर्मचारी नहीं था और उसके द्वारा दी पॉलिसी भी फर्जी थी।
कंपनी की ओर से मामले की जांच किए जाने के बाद पुलिस को शिकायत दी। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार बाद में आरोपी ने रुपये वापस कर दिए और शिकायतकर्ता ने आगे कानूनी कार्रवाई नहीं चाही। हालांकि एसीजेएम-1 शिमला की अदालत ने माना कि मामला केवल ग्राहक से ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि आरोपी ने बीमा कंपनी का नाम और पहचान इस्तेमाल कर कंपनी की साख को नुकसान पहुंचाया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया और पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के आदेश दिए। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं के साथ आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब आरोपी की भूमिका, फर्जी पॉलिसी तैयार करने, कंपनी के नाम का इस्तेमाल करने और ऐसे अन्य लोगों को ठगी का शिकार बनाने की संभावनाओं की भी जांच कर रही है।