मुख्यमंत्री अपने मित्रों के लिए मेरिट लिस्ट तक चोरी करने पर उतारू हैं। पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठतम अधिकारी को सेवा विस्तार देने और विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया को अकारण रद्द करने के मामलों में उच्च न्यायालय के फैसलों ने सरकार की तानाशाही और मनमानी को बेनकाब कर दिया है। पूर्व सीएम ने न्यायालय के फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि जनहित के नाम पर केवल मित्रहित साधा जा रहा है। संवैधानिक आयोगों और उच्च पदों पर नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इसी तरह जल शक्ति विभाग के एक दागी अधिकारी को दिए गए सेवा विस्तार पर भी उच्च न्यायालय सख्त टिप्पणी कर चुका है और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से दूर रखने का आदेश दे चुका है। व्यवस्था परिवर्तन का दावा करने वाली सरकार में शुचिता पूरी तरह नदारद है।