मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर।
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सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी पर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर इस यूनिवर्सिटी से कांगड़ा और चंबा जिला सहित कुल्लू के आनी और निरमंड के कॉलेजों की संबद्धता हटाने पर आमने-सामने हो गए हैं। सुक्खू कह रहे हैं कि भाजपा ने बगैर आधारभूत ढांचा विकसित किए इसे राजनीतिक लाभ लेने के लिए खोला तो जयराम कह रहे हैं कि सीएम मंडी के साथ सही नहीं कर रहे हैं।
जिस तरह से बगैर विद्यार्थियों, शिक्षकों के स्कूल खोले, उसी तरह मंडी में विवि खोला : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि जिस तरह से स्कूल खोले, उसी तरह से मंडी मेें सरदार पटेल विश्वविद्यालय को भी खोल दिया। स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और न ही बच्चे हैं। ठीक वैसे ही यह विश्वविद्यालय भी खोल दिया गया। इस विश्वविद्यालय में जितने विद्यार्थियों की परीक्षा होनी है। उसका आधारभूत ढांचा नहीं है। लोकसभा चुनाव आ रहे हैं तो भाजपा नेता तरह-तरह के शिगूफे छोड़ेंगे। सरकार इस विश्वविद्यालय को बंद नहीं करने जा रही है। जब भी कोई विश्वविद्यालय खुलता है, उसके कुछ नियम-कानून होते हैं। यह ठीक है कि जयराम ठाकुर ने चुनावी लाभ लेने के लिए छह महीने पहले सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी खोला।
इसे कॉलेज में खोला गया और इसके साथ कॉलेजों को संबद्ध कर दिया गया। वह अभी कॉलेज ही है, विश्वविद्यालय नहीं है। इसे विश्वविद्यालय का नाम दिया गया है, पहले आधारभूत ढांचे में सुधार किया जाएगा, उसके बाद पाएंगे कि इसमें क्या-क्या किया जाना है। सुक्खू बोले कि उन्हें विश्वविद्यालय का ढांचा तो बताया जाए कि कहां पर भवन बनाया गया है। मंडी विश्वविद्यालय से मंडी के कॉलेज को उसी से संबद्ध किया गया है। जो कॉलेज निकाले गए हैं, उनके परीक्षा केंद्र कैसे होने चाहिए, उस दृष्टि से निकाले हैं।
सुक्खू का वश चले तो मंडी को हिमाचल से ही निकाल दें : जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री का वश चले तो यह स्थिति पैदा कर दें कि मंडी को हिमाचल से ही निकाल दिया जाए। क्या मंडी हिमाचल प्रदेश का हिस्सा नहीं है। लोग आज बददुआएं दे रहे हैं कि ये भी छीन लिया, वो भी छीन लिया। क्या सुखविंद्र सिंह सुक्खू मानते हैं कि वह हमेशा के लिए मुख्यमंत्री हैं। यह दौर आता-जाता रहेगा। जयराम बोले कि वह प्रार्थना करते हैं कि सुक्खू को सद्बुद्धि दे। मंडी विश्वविद्यालय पिछले डेढ़ साल से ज्यादा समय से फंक्शनल है। आज वहां पर शिक्षकों के वेतन के पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। विश्वविद्यालय की दस करोड़ की ग्रांट रोकी गई है। मंडी ने अगर सरकार बनाने में योगदान नहीं दिया तो मंडी अब हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को हटाने में योगदान देगा।