शिमला। नगर निगम में महापौर की हॉट सीट के लिए सियासत का पारा चढ़ने लगा है। इसी साल दिसंबर में होने वाले चुनाव से ठीक पहले भाजपा पार्षद कई गुटों में बंट गए हैं। पार्षद संजीव ठाकुर की मेयर पद पर दावेदारी के बाद गुटबाजी तेज हो गई है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आरती चौहान समेत जो भाजपा पार्षद कुछ महीने पहले तक महापौर कुसुम सदरेट के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने और उन्हें पद से हटाने के लिए सरकार और संगठन पर दबाव डाल रहे थे, वे अब मेयर के साथ खड़े हो गए हैं। डिप्टी मेयर राकेश शर्मा भी अभी इसी गुट के साथ हैं। ज्यादातर कार्यक्रमों में ये पार्षद महापौर के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं। हालांकि, इसी गुट के कुछ पार्षद भी मेयर या डिप्टी मेयर बनने का ख्वाब पाल रहे हैं। उधर, बाकी भाजपा पार्षदों ने इस गुट से दूरी बना ली है। इनमें कई भाजपा पार्षद तो अब मेयर कार्यालय भी नहीं जा रहे। नगर निगम आने पर ये आयुक्त समेत बाकी अधिकारियों से तो मिलते हैं, लेकिन महापौर से सिर्फ मासिक सदन में ही सामना होता है।
मंत्री के दरबार में लगा रहे हाजिरी
कई पार्षद ऐसे भी हैं जो मंत्री के दरबार में आए दिन हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं और नगर निगम की हर हलचल की सूचनाएं दे रहे हैं। महापौर के चुनाव के लिए अब महज साढ़े तीन महीने बचे हैं, ऐसे में निगम में दिन प्रतिदिन चर्चाएं तेज हो रही हैं। इस समय मेयर पद के लिए खुद महापौर कुसुम सदरेट के अलावा संजीव ठाकुर, सत्या कौंडल, मीरा शर्मा, डिप्टी मेयर राकेश शर्मा, शैलेंद्र चौहान, किमी सूद, किरण बावा आदि पार्षद प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। अब देखना यह है कि स्थानीय विधायक व मंत्री किस नए चेहरे पर दांव खेलते हैं।
निर्दलीय-कांग्रेसी पार्षदों से मांग रहे वोट
मेयर पद के कई दावेदारों ने निर्दलीय पार्षदों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। नगर निगम में विकासनगर की रचना भारद्वाज निर्दलीय पार्षद हैं। इनसे भी एक गुट ने वोट देने के लिए संपर्क किया है। कई कांग्रेसी पार्षदों से भी दावेदारों ने संपर्क साधना शुरू कर दिया है। उधर, कांग्रेस इस पूरी स्थिति पर नजरें गड़ाए हुए हैं।