आखिर विभाग ने अभी तक पोलियो की वैक्सीन घाटी क्यों नहीं पहुंचाई, यह बड़ा सवाल है। इस साल बर्फबारी न होने से घाटी के तमाम गांव सड़कों के जरिये जिला मुख्यालय केलांग से जुड़े हैं।
एक सप्ताह पहले तक भुंतर-लाहौल के बीच हेलीकाप्टर की उड़ानें होती रहीं। आपातकाल में भी रोहतांग सुरंग से अभी भी मरीजों को रेस्क्यू किया जा रहा है। विभाग चाहता तो रोहतांग सुरंग के जरिये वैक्सीन की खेप घाटी में पहुंचा सकता था।
दूरभाष पर मुंबई से सीएमओ लाहौल-स्पीति डीडी शर्मा ने कहा कि हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध न होने से पोलिया की वैक्सीन केलांग नहीं पहुंचाई जा सकी। अब अभियान की तिथि को आगे खिसकाने की अनुमति के लिए सरकार को पत्र लिखा है।
उधर, स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने कहा कि पल्स पोलियो अभियान बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें चूक की कोई गुंजाइश नहीं है। एक भी बच्चा अगर छूटता है तो पूरे सुरक्षा चक्र पर सवाल खड़ा हो जाता है। कहा कि निदेशालय से इसकी रिपोर्ट तलब की जाएगी।
जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। काजा के बीएमओ डॉ. अंगदुई दोरजे ने बताया कि स्पीति उपमंडल में विभाग की सतर्कता के कारण समय पर पोलियो वैक्सीन को काजा पहुंचाया गया है।
लाहौल स्पीति जिले मेें पोलियो की दो बूंद पिलाने को 50 पोलियो बूथ बनाए गए हैं। इनमें 35 लाहौल और 15 स्पीति में हैं। पूरे जिले में करीब तीन हजार नौनिहालों को दो बूंद जिंदगी की पिलाई जानी है। लाहौल में वैक्सीन उपलब्ध न होने से यह दवाई नहीं पिलाई जा सकेगी।