27 अगस्त, 1983 को भारतीय सेना में बतौर लैफ्टिनेंट भर्ती हुए मेजर जनरल अतुल कौशिक को इससे पहले पांच अवार्ड मिले हैं। सेना मेडल के साथ बेहतरीन कार्यों के लिए सेना के प्रशस्ति पत्रों से भी नवाजा गया है।
2007 में भी मेजर जनरल अतुल कौशिक को असाधारण कार्यों के लिए सेना पदक मिला था। 2005 में इमरजेंसी में वे दुश्मनों की गोली से चोटिल भी हुए। भारतीय सेना में रहने के दौरान मेजर जनरल अतुल कौशिक ने कई असाधारण कार्य किए हैं।
मेजर जनरल की पहली पोस्टिंग चौथी गोरखा रेजिमेंट में हुई थी। इसके बाद नॉर्थ और ईस्ट सिक्किम में पोस्टिंग के साथ अतुल कौशिक नागालैंड के जंगलों में भी काम कर चुके हैं।
विशिष्ट सेना मेडल के लिए जताई खुशी
अमर उजाला से बातचीत में मेजर जनरल अतुल कौशिक ने विशिष्ट सेना मेडल के लिए खुशी जताई। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना को हाई ऑल्टीट्यूड वारफेयर में हर तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें ऊंचे ऊंचे पर्वतों और पहाड़ों के मौसम में ढालने तथा युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता है। सिखाया जाता है कि मौसम के मिजाज से कैसे दोस्ती की जाती है।