केसीसी बैंक के चेयरमैन डॉ. राजीव भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हर एक-डेढ़ माह बाद आयोजित होती है। इस बैठक में ऐसे खर्चों को स्वीकृति दी जाती है, जिन्हें केवल बीडीओ के माध्यम से ही पास किया जा सकता है।
बैंक के एमडी भी पांच लाख तक की अनुमति दे सकते हैं, जबकि इससे अधिक खर्च के लिए बीओडी की बैठक में मामला रखा जाता है। सोमवार को भी बीओडी की रूटीन बैठक हुई। उन्होंने बताया कि पार्ट टाइम कर्मचारियों को राहत देने के लिए चर्चा तो हुई लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ है।
भारद्वाज ने कहा कि कुछ शाखाएं राजनीति से प्रेरित होकर खोली जाती हैं। उन शाखाओं का उन्होंने खुद दौरा किया है जो घाटे में चल रही हैं। ऐसी शाखाओं को बंद तो नहीं किया जाएगा, लेकिन आगे-पीछे शिफ्ट किया जा सकता है।
कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक समिति के पूर्व चेयरमैन जगदीश सिपहिया ने कहा कि केसीसी बैंक में अभी तक कोई बोर्ड नहीं है। तीन नामित सदस्यों के सहारे ही बैंक शाखाओं को खोलने और बंद करने के निर्णय नहीं लिए जा सकते। प्रदेश सरकार की नाकामी के कारण ही आज तक बैंक की बीओडी का गठन नहीं हो पाया है।
बैंक के सबसे जूनियर अधिकारी बैंक में मठाधीश बन बैठे हैं जो बैंक चेयरमैन को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने अध्यक्ष को सलाह दी है कि वे इन कर्मचारियों के बहकावे में न आकर अपने विवेक से कार्य कर बैंक को बुलंदियों तक पहुंचाएं।