सेल्फ बैलेंसिंग स्कूटर से गश्त करेगी पुलिस।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्मार्ट पुलिस अब सेल्फ बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक सेगवे स्कूटर से गश्त करती नजर आएगी। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने शनिवार को मालरोड पर दो इलेक्ट्रिक स्कूटरों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनका इस्तेमाल रिज मैदान और मालरोड पर तैनात पुलिस कर्मी गश्त के लिए करेंगे। इस स्टील बैलेंसिंग इलेक्ट्रिक स्कूटर से सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने और हुड़दंगियों पर नकेल कसने में पुलिस को मदद मिलेगी। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत शिमला शहर में पुलिस को हाई टैक बनाया जाएगा।
मंत्री ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 76 बॉडी वार्न कैमरे, 25 अल्कोहल सेंसर, 6 स्पीड मीटर और दो लेजर स्पीड गन भी यातायात पुलिस को वितरित किए। कहा कि 60 लाख रुपये के आधुनिक उपकरणों से पुलिस विभाग को बढ़ती गाड़ियों के कारण यातायात सुविधा सुचारु करने में मदद मिलेगी। उन्होंने थाना प्रभारी ढली, न्यू शिमला, छोटा शिमला, बालूगंज और थाना प्रभारी सदर को एल्को सेंसर तथा बॉडी वॉर्न कैमरा के आधुनिक उपकरण प्रदान किए। इस अवसर पर एसपी मोनिका भटुंगरू, एएसपी सुशील, एएसपी विजय शर्मा, एएसपी अभिषेक एस, डीएसपी सिटी मंगत राम और डीएसपी मुख्यालय कमल किशोर वर्मा भी मौजूद रहे।
इलेक्ट्रिक स्कूटर की यह विशेषता
बैटरी से संचालित प्रदूषण मुक्त इस स्कूटर पर एक ही जवान सवार हो सकेगा। स्कूटर 35 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगा। शहर के बाजारों के अलावा संकरी गलियों में भी यह वाहन कारगर साबित होगा। पुलिस दिन में 20 बार स्कूटर से गश्त कर सकेगी। स्कूटर में राइडर को पैर जमीन पर रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सेल्फ बॉडी वेट से संचालित होगा। राइडर के दिमाग के अनुरूप यह काम करेगा। इसमें आधुनिक फीचर की मदद से राइडर को अपने पैर फ्लोर बोर्ड पर ही रखने पड़ेंगे। इसमें एक डिवाइस लगाया है, जो राइडर को गिरने नहीं देगा। इलेक्ट्रिक स्कूटर का भार मात्र 45 किलोग्राम है, जबकि यह 150 किलोग्राम तक का भार उठा सकता है। दो घंटे में पूरी तरह चार्ज होने के बाद यह 30 किलोमीटर तक चलेगा।