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गुड़िया केस में सबूत मिटाने के लिए ये करना चाहती थी पुलिस, आरोपी पर तानी थी पिस्तौल

Tue, 28 Nov 2017 04:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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गुड़िया दुराचार और हत्या मामले से जुड़े आरोपी की पुलिस हिरासत में हत्या मामले में चौकाने वाला खुलासा हुआ है। सूरज की लाश जलाकर पुलिस के आला अफसर हत्या के सबूत मिटाने की तैयारी में थे। 
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सीबीआई सूत्रों के मुताबिक आईजी जैदी और डीएसपी मनोज जोशी ने एसपी शिमला डीब्ल्यूडी नेगी पर दबाव बनाया कि वह सूरज की लाश परिजनों को सौंप दें। 

सीबीआई के मुताबिक इसके पीछे मंशा सूरज का दाह संस्कार करके पूरे घटनाक्रम में सबूत मिटाने की थी। सीबीआई के पास जब यह मामला आया तो पुलिस अधीक्षक शिमला को सीबीआई ने निर्देश दिए कि नए सिरे से पोस्टमार्टम के लिए सूरज के शव को सुरक्षित रखें।

राजू पर हत्या का आरोप मढ़ने की बनाई योजना

डीएसपी मनोज जोशी सूरज सिंह की हत्या के तुरंत बाद पुलिस थाना कोटखाई से बाहर चले गए। जोशी ने पुलिस स्टेशन में एंट्री करवाई कि वह सामान्य ड्यूटी में बाहर निकले हैं। पुलिस स्टेशन को छोड़ने से पहले उन्होंने पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए कि इस मामले के बारे में कोई किसी को कुछ न बताए।

कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से वह इस प्रकरण को सुलझा देंगे। डीएसपी मनोज जोशी ने एसएचओ राजेंद्र सिंह को बताया कि हत्या का आरोप गुड़िया प्रकरण के दूसरे आरोपी राजू पर मढ़ा जाएगा।

इसके बाद राजेंद्र सिंह, दीप चंद, रफी मोहम्मद, मोहन लाल, सूरत सिंह और रंजित स्ट्रेटा सूरज सिंह के शव को कोटखाई अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने वहां उसे पहले से ही मरा हुआ बताया।

डीजीपी को बताए गलत तथ्य

19 जुलाई, 2017 को आईजी जैदी ने डीजीपी के आदेशों के बाद कोटखाई थाने का दौरा किया। उन्होंने पुलिस हिरासत में हुई मौत की फैक्ट फाइडिंग रिपोर्ट तैयार करने को कहा। आईजी ने रात्रि संतरी दिनेश शर्मा से पूछताछ की।

दिनेश ने सारे घटनाक्रम को सही-सही बता दिया। जैदी ने उसका बयान अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया, लेकिन इस सच्चाई को डीजीपी को नहीं बताया गया। सच जानने के बावजूद जैदी ने सूरज सिंह की हत्या की झूठी एफआईआर दर्ज होने दी। 

संतरी ने मोबाइल में रिकार्ड की बातचीत 
संतरी दिनेश शर्मा पर जब एसएचओ राजेंद्र सिंह ने फोन पर दबाव बनाया कि वह सीबीआई को सूरज सिंह हत्याकांड की वही कहानी बताए, जो पुलिस बयान मेें दर्ज है। इसका भी संतरी विरोध करता रहा। दिनेश ने ये सारी बात अपने मोबाइल फोन में रिकार्ड कर दी। बाद में इस रिकार्डिंग को भी सीबीआई ने अपने कब्जे में लिया।

स्कूल बिना बस्ते गई थी गुड़िया 

ये सवाल शुरू से उठ रहा था कि लाश के पास 10वी में पढ़ने वाली गुड़िया का बैग बरामद क्यों नहीं हुआ? जबकि स्कूली वर्दी उतरी हुई मिली थी। इसका खुलासा सीबीआई जांच में हुआ। दरअसल गुडिया चार जुलाई 2017 को अपने छोटे भाई के साथ बिन बैग के स्कूल गई थी।

चूंकि 4 से 7 जुलाई तक स्कूल में टूर्नामेंट चल रहा था इसलिए वो स्कूल बैग लेकर नहीं गई थी। वह स्कूल से घर के लिए शाम साढ़े चार बजे निकली। यह माना गया कि घर जाते हुए उसके साथ दुराचार हुआ और उसकी हत्या कर दी गई।

उसका शव महासू में हलाइला वन क्षेत्र में 6 जुलाई 2017 को सुबह करीब 7 बजकर 40 मिनट पर मिला। इसके बाद कोटखाई थाने में पुलिस ने हत्या और दुराचार का मामला दर्ज किया। गुड़िया नाबालिग थी।

पुलिस ने दीपक पर पिस्तौल तक तानी

छह जुलाई को डीएसपी मनोज जोशी और पुलिस टीम ने राजू, दीपू, छोटू, सूरज सिंह और सुभाष को हलाइला गांव से उठाया और उन्हें लोकेंद्र सिंह उर्फ काकू की गाड़ी में पूछताछ के लिए पुलिस चौकी छैला ले गए। डीएसपी मनोज जोशी के नेतृत्व की पुलिस टीम ने इनको पीटा और प्रताड़ित किया।

दीपक उर्फ दीपू पर पिस्तौल तक तानी गई और कहा गया है कि वह कबूल करे कि यह अपराध उसने और उनके साथियों ने किया है। जब पूछताछ के बाद कुछ नहीं निकला तो उन्हें छह जुलाई की रात को ही छोड़ दिया गया।

हैप्पी और ईशान चौहान को गैरकानूनी तरीके से पुलिस हिरासत में रखा
12 जुलाई को आशीष चौहान, प्रशांत नेगी उर्फ हैप्पी और ईशान चौहान से पुलिस स्टेशन कोटखाई में पूछताछ की गई। इसी दिन आशीष चौहान को गिरफ्तार किया गया जबकि प्रशांत नेगी उर्फ हैप्पी और ईशान चौहान को गैर कानूनी तरीके से पुलिस हिरासत में रखा गया। ईशान और प्रशांत नेगी को गैर कानूनी तरीके से पुलिस हिरासत में रखा गया और उनसे अपराध कबूल कराने के लिए पुलिस ने लगातार दबाव बनाया। 
 

10 जुलाई को जैदी बनाए गए एसआईटी प्रमुख

10 जुलाई को डीजीपी ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी के प्रमुख आईजी जहूर हैदर जैदी बनाए गए। इसमें डीएसपी मनोज जोशी, एसएचओ कोटखाई थाना राजेंद्र सिंह और अन्य सदस्य बनाए गए।

तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यूडी नेगी को यह जिम्मेवारी दी गई कि वह इसकी समयबद्ध जांच हो, क्योंकि यह मामला उनके कार्यक्षेत्र में आता है। बाद में इस एसआईटी में डीएसपी ट्रैफिक शिमला रतन सिंह नेगी, एसआई धर्म सेन नेगी और एएसआई राजीव कुमार को भी जोड़ा गया। 

पहले एएसआई दीपचंद के पास थी गुड़िया मामले की जांच 
छह जुलाई को एएसआई दीपचंद ने गुड़िया मामले की जांच शुरू की और घटनास्थल का दौरा किया। इस दौरान लैब जुनगा और डीएसपी मनोज जोशी के साथ उन्होंने घटनास्थल से कई तरह के नमूने उठाए। लेकिन बाद में दीपचंद एसआईटी में शामिल हो गया। 
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सड़कों पर उतर आए थे लोग

सीबीआई की छानबीन में पाया गया कि आठ जुलाई को एसपी डीडब्ल्यू नेगी महासू गए और आठ जुलाई तक वहीं रहे। इस मामले की जांच इसी बीच एएसआई दीप चंद से ट्रांसफर कर एसएचओ राजेंद्र सिंह को दी गई। इसी बीच लोग मामले की ठीक से जांच न होने को लेकर सड़कों पर उतर आए।

इसी के बाद डीजीपी ने 10 जुलाई को एसआईटी बनाई। जांच में पाया गया है कि 10 जुलाई को एसआईटी के सदस्य महासू और कोटखाई गए तथा उन्होंने राजेंद्र उर्फ राजू, दीपक उर्फ दीपू, सुभाष, लोकजन उर्फ छोटू और सूरज सिंह से वन विश्राम गृह में पूछताछ की।

एसआईटी के सदस्यों ने इन्हें बुरी तरह से मारा पीटा। हलाइला गांव के स्थानीय निवासी देवेंद्र नेगी पुत्र अनंत राम नेगी भी उस समय महासू वन विश्राम गृह में थे। यह सब उन्हीं के पास काम करते थे। नेगी ने पूछताछ के तरीके का विरोध किया और अपराध कबूल करने के बजाय वैज्ञानिक जांच करने की मांग की। 
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