पुलिस मुख्यालय ने सीआईडी को मिलने वाली 50 लाख रुपये की सोर्स मनी को रोक दिया है। प्रदेश सरकार ने पुलिस मुख्यालय के माध्यम से सीआईडी को राशि भेज रखी है, लेकिन यह राशि सीआईडी को नहीं दी जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस मुख्यालय ने सरकार को पत्र लिखकर इस राशि को सीआईडी के बजाए पुलिस मुख्यालय को ही देने के लिए कहा है। हिमाचल में सीआईडी की ओर से कोई भी ऑपरेशन और घटना होने पर सोर्स को मजबूत करने, बाॅर्डर एरिया में ऑपरेशन, टास्क फोर्स गठित करने के अलावा एसआईटी को बाहरी राज्यों में भेजने के लिए इस राशि को खर्च किया जाता है, लेकिन सीआईडी को यह पैसा नहीं मिला है। सूत्रों के अनुसार इस राशि का ऑडिट भी नहीं होता है।
प्रदेश सरकार की ओर से खुफिया तंत्र मजबूत करने के लिए हर साल सीआईडी को 8 से 10 लाख रुपये सोर्स मनी दी जाती रही है। सीआईडी की ओर से तीन करोड़ रुपये की राशि का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। इसमें से 50 लाख रुपये सीआईडी को देने की बात कही गई है। सूत्र बताते हैं कि सीआईडी को पैसा न मिलने पर डीजीपी एसआर ओझा की ओर से प्रदेश सरकार को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि अभी तक सीआईडी को यह पैसा नहीं मिला है। पुलिस मुख्यालय ने यह पैसा जारी नहीं किया है।
प्रदेश की सीआईडी (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) का काम, राज्य में होने वाले आपराधिक मामलों की जांच करना होता है। इसमें हत्या, दंगा, अपहरण, चोरी आदि की जांच सीआईडी करती है। सीआईडी राज्य पुलिस की एक खुफिया जांच शाखा है। यह राज्य सरकार के अंतर्गत काम करती है। सीआईडी कोर्ट के आदेश या राज्य सरकार के कहने पर किसी मामले की जांच करनी होती है। सीआईडी का नेतृत्व पुलिस महानिदेशक या अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रैंक का अधिकारी करता है।