नौ जनवरी 2013 को सर्विस पिस्टल से गोली चलने से हो गई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सीबीआई की विशेष अदालत ने तारादेवी गोलीकांड में हिमाचल प्रदेश पुलिस के कांस्टेबल रणबीर सिंह को गैर-इरादतन हत्या 304-दो और 324 चोट पहुंचाने के मामले के दंडनीय अपराधों से डिस्चार्ज कर दिया है। अदालत में करीब 13 साल केस चला।
न्यायालय ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और साक्ष्य आरोपी के खिलाफ उपरोक्त अपराधों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने सभी तथ्यों को जांचने के बाद कहा कि गोली झड़प के दौरान सर्विस पिस्टल छीने जाने की कोशिश में पूरी तरह दुर्घटनावश चली थी। इससे हत्या का कोई इरादा सिद्ध नहीं होता। विशेष सीबीआई जज ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी अगर जानमाल और सरकारी हथियार बचाने की कोशिश में अनजाने में गोली चल जाए, तो उसे अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए आरोपी द्वारा प्रस्तुत जमानत बांड रद्द कर दिया है।
कांस्टेबल रणबीर सिंह ने ट्रायल से पहले अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सीबीआई की विशेष अदालत में सीआरपीसी की धारा 239 के तहत एप्लीकेशन लगाई थी। 9 जनवरी वर्ष 2013 को यह मामला सामने आया था जब पुलिस कांस्टेबल रणबीर सिंह और राहुल राणा जंकयार्ड तारादेवी में ड्यूटी पर तैनात थे। इसी रात उदयवीर सिंह दोस्तों के साथ जंकयार्ड में अपनी गाड़ी देखने के लिए पहुंचा। ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मचारियों के साथ उनकी झड़प हो गई। इस दौरान पुलिस कर्मी की सर्विस पिस्टल से चली गोली लगने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया और आईजीएमसी में उसकी मौत हो गई। मामले में दोनों पक्षों की ओर से पुलिस थाना बालूगंज में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई। पहले जिला पुलिस ने जांच की। इसके बाद सीआईडी को मामला सौंपा गया। इस बीच उदयवीर सिंह की मां ने प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका लगाकर सीबीआई से मामले की जांच करवाने की गुहार लगाई। उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की लेकिन अभी इसका ट्रायल शुरू नहीं हुआ था। सीबीआई मामले में पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई। इस वजह से सबूतों के अभाव के कारण आरोपी पर अब न चार्ज फ्रेम होंगे और न ही ट्रायल चलेगा।