बिजली बोर्ड के कर्मचारी जान हथेली पर रखकर भारी बर्फबारी के बीच बिजली बहाल करने में लगे हैं। स्नो किट न मिलने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्नो किट नहीं होने से कर्मियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली बोर्ड के फील्ड स्टाफ को स्नो किट नहीं मिलने पर इंप्लाइज यूनियन भड़क उठी है।
हालत यह है कि ठंड से बचने के लिए लकड़ी तक मुहैया नहीं करवाई जाती है। मात्र एक गैस का चूल्हा दिया गया है। काजा, पूह में स्थिति बदतर है। विद्युत वृत्त रामपुर से 87 स्नो किटों की डिमांड भेजी गई है, लेकिन अभी तक इन क्षेत्रों में स्नो किटें नहीं भेजी गई हैं। विद्युत वृत्त कार्यालय डलहौजी के तहत डलहौजी, सलूणी, भरमौर, तीसा, किलाड़, पांगी के लिए 125 स्नो किटों की डिमांड होने के बावजूद मात्र 44 किटें मुहैया करवाई गई हैं। यूनियन ने बोर्ड प्रबंधन से कर्मियों के हित में फैसले लेने की मांग की है।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा है कि जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के प्रति बिजली बोर्ड के अधिकारियों का व्यवहार पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना है। जनजातीय क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के बावजूद वहां पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए अभी तक स्नो किटें मुहैया नहीं करवाई हैं। शाैंगटाेंग विद्युत परियोजना की जल निकासी की नालियों में रात को बर्फ जम जाती है। दूसरे दिन तभी उत्पादन शुरू हो पाता है, जब बर्फ से भरी निकासी की नालियों को साफ किया जाता है।