प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिब्बन काटकर अटल टनल रोहतांग का लोकार्पण किया। पीएम मोदी ने टनल के साउथ पोर्टल पर लोकार्पण किया। बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने पीएम मोदी को टनल के बारे में जानकारी दी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मनाली के सासे हेलीपैड पर पहुंचे। सासे हेलीपैड पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम जयराम ठाकुर ने उनका स्वागत किया।
उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने निगम की बस को हरी झंडी दिखाकर 15 बुजुर्ग यात्रियों को साउथ पोर्टल की तरफ रवाना किया। टनल से गुजरने के बाद नॉर्थ पोर्टल में सिस्सू झील के समीप चंद्रा नदी के बीच एक टापू में पीएम मोदी लाहौल के 200 लोगों को संबोधित करेंगे। टनल शुरू होने से अब लाहौल के लोग सर्दियों में बर्फबारी के चलते छह माह तक शेष दुनिया से नहीं कटेंगे।
सेना इस मार्ग से चीन से सटी सीमा लद्दाख और पाकिस्तान से सटे कारगिल तक आसानी से पहुंच जाएगी। टनल से मनाली और लेह के बीच दूरी 46 किमी कम हो गई है। मात्र डेढ़ घंटे में मनाली से केलांग पहुंच जाएंगे। टनल से सूबे के पर्यटन को भी गति मिलेगी।
एक नजर में जानें अटल टनल रोहतांग
1972 में पूर्व विधायक लता ठाकुर ने छह माह बर्फ में कैद रहने की समस्या से अवगत कराया तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देखा था टनल बनाने का सपना।
वर्ष 2000 को अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने मित्र टशी दावा उर्फ अर्जुन गोपाल के निमंत्रण पर जून 2000 को केलांग पहुंच रोहतांग सुरंग निर्माण की विधिवत घोषणा की थी।
28 जून 2010 को सोनिया गांधी ने टनल का शिलान्यास किया। टनल के लिए 1355 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया।
2003 में कांगणी नाले में बादल फटने से रोहतांग टनल निर्माण में लगे 60 श्रमिकों की मौत हो गई थी।
2014 में ब्यास नदी में बाढ़ आने से हाकी पुल का बहुत बड़ा भाग बहने के कारण लगभग 20 श्रमिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
9.02 किलोमीटर लंबी टनल से 46 किलोमीटर का सफर कम होगा। चार से पांच घंटे कम लगेंगे और सेना आसानी से लेह पहुंच सकेगी।
करीब 3,300 करोड़ रुपये की लागत से बनी है यह सुरंग।
टनल में हर 150 मीटर की दूरी पर टेलीफोन सुविधा होगी। 60 मीटर पर हाइड्रेंट, हर 500 मीटर पर आपातकालीन निकास, प्रत्येक 2.2 किमी में वाहन मोड़ सकेंगे।
हर 1 किमी में हवा की गुणवत्ता चेक होगी। हर 250 मीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।