पीएम ने कहा, जिंदगी का मतलब ठहराव नहीं है, जिंदगी का मतलब ही होता है गति। अगर हम अपने आपको कसौटी के तराजू पर झौकेंगे नहीं तो जिंदगी में ठहराव आ जायेगा। जिंदगी का मतलब ही होता है गति, जिंदगी का मतलब ही होता है सपने।
निराशा में डूबा समाज, परिवार या व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता है, आशा और अपेक्षा उर्ध्व गति के लिए अनिवार्य होती है। अपेक्षा आवशयक होती है। अपेक्षा के कारण ही हमे कुछ ज्यादा करने की इच्छा होती है।
परीक्षा से बाहर भी बहुत बड़ी दुनिया है। इसे कक्षा की परीक्षा ही समझें जिंदगी की न समझें। अभी नहीं तो कभी नहीं ऐसा मत सोचिए। सोशल स्टेटस के लिए मां बाप बच्चे पर दबाव डालते हैं। रिपोर्ट कार्ड परिवार का विजिटिंग कार्ड नहीं बनना चाहिए।
अपेक्षाओं के बोझ में हमें दबना नहीं चाहिए। अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने आपको सज करना चाहिए। लोग कहते हैं मोदी ने बहुत आकांक्षा जगा दिए हैं, मैं तो चाहता हूं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के सवा सौ करोड़ महत्वकांक्षा होनी चाहिए।
हमें उन आकांक्षाओं को उजागर करना चाहिए देश तभी चलता है। अपेक्षाओं के बोझ में दबना नहीं चाहिए। हमें अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने आपको सिद्ध करना चाहिए।
ऑनलाइन गेम समस्या भी है और समाधान भी। प्रौद्योगिकी को मन के विस्तार और नवाचार के साधन के रूप में आगे बढ़ाना चाहिए। तकनीक का आज बहुत बड़ा योगदान है। बच्चों को तकनीक का सही इस्तेमाल बताना चाहिए।
तकनीक का उपयोग हमारे विस्तार के लिए, हमारे सामर्थ्य में बढ़ोतरी के लिए होना चाहिए। हंसना, खेलना जीवन के लिए बहुत जरूरी है। एकाध परीक्षा में कुछ हो जाए तो जिंदगी ठहर नहीं जाती है। बच्चों को हमेशा डांटना रहना ठीक नहीं है।
बच्चों की गलतियों को प्यार से सुधारें। हम बच्चों को तकनीक से हटा नहीं सकते हैं। उन्हें इसका सही फायदा बताना चाहिए। दबाव न ले इससे डर पैदा होता है। खुले मैदान में खेलना ये जीवन का हिस्सा होना चाहिये और बच्चो को तकनीक की सही दिशा में ले जाना चाहिये।
लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच में तो हो, पर पकड़ में न हो। जब हमारा लक्ष्य पकड़ में आएगा तो उसी से हमें नए लक्ष्य की प्रेरणा मिलेगी। लक्ष्य हमारे सामर्थ्य के साथ जुड़ा होना चाहिए और अपने सपनों की ओर ले जाने वाला होना चाहिए। हर बच्चे की सकारात्मक चीजों को समझना आवश्यक है।
निशान चूक जाए तो माफ हो सकता हैं लेकिन निशान नीचा हो तो कोई माफी नहीं, लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच में हो लेकिन पकड़ में न हो। मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों की चिंता करता हूं। अपनो के लिए सोचना जरूरी है।
जब मन में अपनेपन का भाव पैदा हो जाता है तो फिर शरीर में ऊर्जा अपने आप आती है और थकान कभी घर का दरवाजा नहीं देखती है। मेरे लिए भी देश के सवा सौ करोड़ देशवासी मेरा परिवार है। सफल लोगों को समय का दबाव नहीं होता।
जब मन में अपनेपन का भाव पैदा हो जाता है तो फिर शरीर में ऊर्जा अपने आप आती है और थकान कभी घर का दरवाजा नहीं देखती है। मेरे लिए भी देश के सवा सौ करोड़ देशवासी मेरा परिवार है। जो सफल लोग होते हैं, उन पर समय का दबाव नहीं होता है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्होंने अपने समय की कीमत समझी होती है। कसौटी बुरी नहीं होती, हम उसके साथ किस प्रकार के साथ डील करते हैं उस पर निर्भर करता है। मेरा तो सिद्धांत है कि कसौटी कसती है, कसौटी कोसने के लिए नहीं होती है।
एग्जाम को अगर हम अवसर मानें तो इसमें मजा आएगा। समय को बर्बाद करना हमारी आदत बन गई है। बच्चों की बच्चों से तुलना करना ठीक नहीं है। तुलना से बच्चों पर बहुत फर्क पड़ता है।
बच्चों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। अभिभावकों का सकारात्मक रवैया, बच्चों की जिंदगी की बहुत बड़ी ताकत बन जाता है। आप नॉलेज के पीछे दौड़िए, मार्क्स दौड़कर आएंगे।
आप अपने रिकॉर्ड से ‘कॉम्पिटिशन’ कीजिए और हमेशा अपने रिकॉर्ड ब्रेक कीजिए। इससे आप कभी निराश नहीं होंगे और तनाव में नहीं रहेंगे। अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों के डिप्रेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
डिप्रेशन या स्ट्रेस से बचने के लिए काउंसिलिंग से भी संकोच नहीं करना चाहिए, बच्चों के साथ सही तरह से बात करने वाले एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए।
बच्चों, शिक्षकों व मां –बाप किसी को भी डिप्रेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर समय रहते बच्चों से सही तरह से बातचीत करेंगे, उनके साथ समय बिताएंगे तो ऐसी स्थिति से आसानी निपटा जा सकता है।
हिमाचल के जिन छह विद्यार्थियों को कार्यक्रम में हिस्सा लेने का मौका मिला, उनमें जिला कांगड़ा के केंद्रीय विद्यालय पालमपुर से चंदन सिंह पठानिया, धर्मशाला स्कूल से शौर्या, केंद्रीय विद्यालय मंडी से जुली वर्मा, बिलासपुर के भराड़ी स्कूल से देवांश, सरकारी स्कूल मंडी से निखिल कुमार और जवाहर लाल नेहरू विद्यालय पेखूवाला जिला ऊना से गुरप्रीत कौर शामिल हैं। इनके अलावा शिमला से मोहित गुप्ता और बिलासपुर से कमल लाल अभिभावकों की श्रेणी और कांगड़ा से शिखा व वैशाली शिक्षकों की श्रेणी के तहत कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चयनित हुए।