इस दौरान उन्होंने कृषि के अतिरिक्त, केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं का प्रदेश में सुचारु कार्यान्वयन, विश्वविद्यालय स्तर पर गुणात्मक शिक्षा व शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के प्रयास, कौशल विकास, आंतरिक सुरक्षा, राजभवन के माध्यम से नव प्रोत्साहन की दिशा में कार्य और सामाजिक सरोकार के अन्य विषयों पर चर्चा की।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दोगुना करने के संकल्प पर हिमाचल गंभीरता से कार्य कर रहा है। उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए शून्य लागत प्राकृतिक कृषि का विकल्प दिया है।
गो पालन से जुड़ी इस प्राकृतिक कृषि की विस्तृत जानकारी को लेकर उन्होंने शून्य लागत प्राकृतिक कृषि नाम से एक पुस्तक का लेखन व प्रकाशन भी किया है जिसे प्रदेश के किसानों को नि:शुल्क वितरित किया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए 25 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान नामक एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है जो प्राकृतिक कृषि पर आधारित है।
इसके तहत प्रदेश के कांगड़ा, मंडी जिला और सोलन जिलों में किसानों के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया गया है। इन शिविरों को निचले स्तर तक आयोजित किया जा रहा है और मास्टर ट्रेनर तैयार कर किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने पीएचडी कर रहे विद्यार्थियों को किसानों से सीधे जोड़ने और उनके शोध कार्य किसानों के खेत में करने को कहा है। राज्यपाल के तौर पर उन्होंने हिमाचल में स्वच्छता, जल एवं पर्यावरण
संरक्षण के लिए कार्य, कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम, नशा मुक्ति, शून्य लागत प्राकृतिक कृषि एवं गो पालन और जातिवाद को समाप्त करने के लिए सामाजिक समरसता कायम करना जैसे अभियान शुरू किए।