सहमति के बाद ही उन्हें उस स्कूल का मोती बनाया जा सकेगा। इस पूरी प्रक्रिया में लंबा समय लगेगा। इसलिए योजना को शुरू करने के लिए प्रदेश सरकार ‘जुगाड़’ की तकनीक अपना रही है।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि योजना में स्थानीय लोगों और पंचायतों को शामिल किया जाएगा।
सरकार का प्रयास है कि ऐसे पूर्व छात्रों को मार्गदर्शक के तौर पर उनके स्कूलों से जोड़ा जाए। इससे स्कूलों के विकास और शिक्षा के स्तर में सुधार में उनकी मदद ली जा सकेगी। सभी विधायकों से भी आग्रह किया गया है कि वे उन स्कूलों से जुड़ें, जहां से उन्होंने पढ़ाई की है।