केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में हिमाचल को तरजीह न देकर भाजपा ने यह साफ संकेत दिए हैं कि पीएम मोदी के भरोसे ही पार्टी विधानसभा चुनाव में उतरेगी।भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश में अंदरूनी समीकरणों से छेड़छाड़ से बच रहा है। प्रदेश से मंत्री बनने से विधानसभा चुनावों में फायदा मिलने के दावों की भी हवा निकल गई है।
प्रदेश के नेताओं को भी यह संदेश मिल गया है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही केंद्र उनका कद तय करेगा। इसके अलावा बड़े राज्यों को साधने की कोशिश में भी हिमाचल मोदी कैबिनेट के फार्मेट में फिट नहीं बैठा है।
पीएम मोदी कैबिनेट के विस्तार में भाजपा ने रणनीतिक लिहाज से नए चेहरों को चुना है। हिमाचल में विधानसभा चुनावों के चलते किसी एक सांसद को कम से कम राज्य मंत्री का दर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही थी।
इसी के चलते सांसद अनुराग ठाकुर का नाम दावेदारों में माना जा रहा था। प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट विस्तार से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से हुई बैठक में हिमाचल पर भी चर्चा हुई।
जानकारों के अनुसार बैठक में जल्द चुनावों में जाने वाले राज्यों गुजरात और हिमाचल को बाहर रखने पर सहमति बनी। पार्टी का मानना है कि इन राज्यों में मोदी ही चुनावी चेहरा होंगे।
ऐसे में केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों को मौका दिया गया। माना केंद्र ने प्रदेश में चुनावों से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं देने की रणनीति के तहत ये निर्णय लिया है।
कई केंद्रीय मंत्रियों को नई पारी के लिए हटाया गया, लेकिन हिमाचल से एकमात्र मंत्री जेपी नड्डा से छेड़छाड़ नहीं की गई। प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए प्रेमकुमार धूमल और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा रेस में माने जा रहे हैं, लेकिन भाजपा ने मंत्रिमंडल विस्तार कर संशय बनाए रखा।