फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: गेयटी में सीढि़यां नाटक से दिखाई सामाजिक विघटन की तस्वीर

विज्ञापन
शिमला के गेयटी थिएटर में नाट्य उत्सव के अंतर्गत सीढ़ियां नाटक का मंचन करते कलाकार।फोटो संवाद
विज्ञापन
प्रतिभा नाट्य उत्सव के दूसरे दिन कलाकाराें ने दिखाया समाज को आईना
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के गोथिक हॉल में सीढि़यां नाटक से सामाजिक विघटन की तस्वीर दिखाई गई। थियेटर में चल रहे तीन दिवसीय प्रतिभा नाट्य उत्सव के दूसरे दिन नाटक में कलाकारों ने अपने अभिनय से समाज को वह आईना दिखाया जिसमें न पहले कुछ बदला था और न ही आज कुछ बदल पाया है।
दया प्रकाश सिन्हा की ओर से लिखित हिंदी के इस चर्चित नाटक सीढि़यां का मंचन अरविंद सिंह चंद्रवंशी के निर्देशन में किया गया। नाटक में मुगल शासन के अंतिम चरण में साम्राज्य के बिखराव के साथ सामाजिक विघटन काल खंड दिखाया गया। यह वह समय था जब साम्राज्य समाज के गिरते मूल्यों के साथ अपनी पहचान खो बैठता है। इसमें पतित समाज यानी जो समाज अपने मूल्य खो बैठा हो, भ्रष्टता और विलास जैसे बदरंग से भरा है वह दिखाया गया। इन्हीं से बनी गुजरे वक्त की तस्वीर इस नाटक में दिखाई गई है जिसमें समय के साथ न रंग घुले और न ही उड़े। नाटक में दिखाया गया कि वर्तमान कि तस्वीर में भी इस काल की तस्वीर के धुंधले रंगों की झलक आज भी समाज में स्पष्ट दिखाई देती है। सीढ़ियां नाटक का नायक न मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला है न ढिढोर्ची से सूबेदार बनाने वाला सलीम। यह नाटक वह कालखंड है जिसमे वही सत्य है जिसमे विजय हो। इसमें दिखाया गया कि सत्य पर असत्य आस्था पर अनास्था, प्रेम पर वासना और करुणा पर हिंसा की जीत युग धर्म है। इसमें दिखाया गया कि कापुरुषता से नपुंसकता तक, विलास से विनाश, राग रंग से रक्त धाराओं और महत्वकांक्षा की सूली पर लटकते मानव के सबसे पवित्र संवेग भी वही हैं और अंत भी वही। इसमें दिखाया गया कि कैसे एक के बाद, दूसरी सीढ़ी बदली लेकिन यात्रा का पड़ाव वही रहा। सवाल वही रहा, समस्या वही और स्वार्थ भी वही रहा अगर एक वाक्य में कहें नाटक के नाम के अनुसार यही है सीढ़ियां। यह नाटक दिल्ली की प्रमुख नाट्य संस्था समुखा पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा के नाटकों पर केंद्रित प्रतिभा नाट्य उत्सव का दूसरा मंचन था जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, उत्तर क्षेत्र संस्कृति केंद्र पटियाला और गेयटी थियेटर के सहयोग चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बाक्स
इन कलाकारों ने किया नाटक का मंचन
गेयटी के गोथिक हॉल में मंचित सीढि़यां नाटक में मोहम्मद शाह रंगीला का किरदार निर्देशक अरविंद सिंह चंद्रवंशी ने निभाया। इसके साथ ही हिमांशु, अफसा सैफी, चाहत ओझा, रघुवीर सिंह, सौरभ (शुभम पाल), अभिषेक वर्मा, यश राज, अमित, राजेश, रुचिका, प्रसून नारायण, पूजा, स्वाति, अक्षत सिंह, प्रसून, सौरभ, राजेश, रघुवीर और शिवाजी राव ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया। इसमें मुकेश झा की प्रकाश परिकल्पना और प्रसून नारायण का संगीत नाटक को सफल बनाने में सहायक रहा। प्रतिभा नाट्य उत्सव के समापन पर सोमवार को शिमला की नाट्य संस्था शिमला एक्टिंग अकादमी की ओर से मन के भंवर नाटक का मंचन रूपेश भीमटा के निर्देशन में किया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें