सरकार के आदेशों पर एचआरटीसी ने वाहनों की संख्या कम करने के लिए करवाया था सर्वे, 32 टेंपों
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ट्रैवलर चलाने की बनाई थी योजना
लोगों को राहत दिलाने वाले प्लान अभी तक लागू नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी की लाखों की आबादी को हर रोज बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए बनने वाले प्लान फाइलों में ही जाम हो गए हैं। प्रदेश सरकार के आदेशों पर एचआरटीसी ने एक साल पहले शहर में वाहनों की संख्या को नियंत्रित करने और लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध करवाने के लिए सर्वे किया था।
इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पीक ऑवर्स में वाहनों की संख्या का पता लगाने के साथ ही लोगों से भी बातचीत की थी। सर्वे में शहरवासियों ने बातचीत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करने की बात पर हामी भरी थी। निगम के सर्वे में कसुम्पटी, छोटा शिमला के अलावा संजौली, ढली, बालूगंज और संकटमोचन समेत सभी क्षेत्रों को शामिल किया गया था। योजना थी कि लोगों को शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी जिससे की निजी वाहनों की संख्या कम हो और शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिल सके।
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एचआरटीसी ने सर्वे में शहर के वाहनों की संख्या के आधार पर अधिक दबाव वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया था। इसी के आधार पर पहले चरण में 32 टेंपों ट्रैवलर चलाने की योजना बनाई थी। प्रदेश सरकार की योजना से शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था सुदृढ़ होनी थी तो वहीं निजी वाहनों की संख्या कम होने से शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी लोगों को निजात मिलनी थी लेकिन यह योजना सर्वे और प्रस्ताव तैयार होने के बाद शहर में अन्य ट्रैफिक प्लान की तरह धरातल पर नहीं उतरी। एचआरटीसी के डीएम शिमला देवासेन नेगी ने बताया कि निगम ने इस संबंध में सर्वे किया था। इसके बाद प्रदेश सरकार को प्रस्ताव को भेज दिया है।
सचिवालय, आईजीएमसी के लिए चलाए जाने थे वाहन
एचआरटीसी ने सर्वे के बाद प्रदेश सचिवालय, विश्वविद्यालय, आईजीएमसी समेत अन्य सरकारी कार्यालयों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध करवाने की योजना बनाई थी। निगम के सर्वे में सामने आया था कि कार्यालयों और अन्य जरूरी कामकाज के लिए ज्यादातर लोग अकेले की वाहनों में सफर करते हैं। इस वजह से शहर में पीक ऑवर्स में सुबह 9:00 से 11:00 बजे तथा शाम 5:00 से 7:00 बजे तक सबसे अधिक जाम लगता है। इसको देखते हुए शहर के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसे स्थानों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध करवाने पर जोर दिया था। निगम ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा था लेकिन यहां से आगे बात नहीं बनी और मामला अटक गया। यही वजह है कि आज भी शहर की जनता हर रोज लंबे ट्रैफिक जाम से जूझने को मजबूर है।