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Shimla News: फुटपाथ पर लगे रेत-बजरी के ढेर, दुर्घटना का खतरा

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बीसीएस-विकासनगर के बीच बने फुटपाथ पर रखी जा रही निर्माण सामग्री, वाहनों भी किए जा रहे हैं पार्क
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लोगों को सड़क के बीच से करना पड़ रही आवाजाही
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला को स्मार्ट सिटी बनाने को आम जनता की सुविधा के लिए बने फुटपाथ पर वाहन पार्क हो रहे हैं। कुछ जगह रेत बजरी भी उतारा जा रहा है।
शहर के बीसीएस और विकासनगर नाले के पास बने फुटपाथ को निर्माण सामग्री से भर दिया है। यह पैदल रास्ता अब, रेत, बजरी, ईंटें उतारने का ठिकाना बन गया है। लगातार इस फुटपाथ पर इसी तरह से निर्माण सामग्री उतारी जा रही है। इससे यहां से रोज गुजरने वाले लोगों को मजबूरन मुख्य सड़क से ही पैदल चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस रास्ते से रोज सैकड़ों लोग, स्कूली बच्चे पैदल चलते हैं। निर्माण सामग्री से बंद किए पैदल रास्ते का वह उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। लोगों की सुरक्षा को लाखों खर्च कर बनाया यह पैदल रास्ता लोगों के काम नहीं आ रहा है।
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एक से डेढ़ किलोमीटर के बने इस पैदल रास्ते में निर्माण सामग्री के अलावा निजी कारें अन्य वाहन भी पार्क हो रही हैं। इससे लोग चाहकर भी पैदल रास्ते से जा नहीं पाते। रास्ते के किनारे पैदल लोगों की सुरक्षा के लिए लगाई रेलिंग भी कई जगह से गायब हो गई है। नगर निगम प्रशासन, स्थानीय पुलिस प्रशासन आम जनता के लिए बने फुटपाथ पर निर्माण सामग्री को उतारने वालों, इसके आगे अपने निजी वाहनों को पार्क करने वालों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने में अब तक नाकाम रहा है। प्रशासन को चाहिए कि कम से कम पैदल लोगों के लिए रास्ते को खुला रखा जाए।


लोगों को हो रही दिक्कत : सिंह
स्थानीय निवासी प्रताप सिंह ने कहा कि इस मुख्य सड़क से तेज रफ्तार से वाहन गुजरते हैं। फुटपाथ पर निर्माण सामग्री और वाहनों के पार्क किए जाने से पैदल रास्तों का लोग उपयोग ही नहीं कर पा रहे हैं।
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लोग हो सकते हैं हादसे का शिकार : जोगेंद्र

जोगेंद्र शर्मा ने कहा कि बीसीएस और विकासनगर के बीच रोज सैकड़ों लोग, दिहाड़ीदार मजदूर, स्कूली छात्रों, अभिभावकों का आना जाना होता है। स्थानीय लोगों और यहां काम करने आने वाले लोगों की सुविधा के लिए ही लाखों का बजट खर्च कर फुटपाथ बनाए थे जिसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है।


पैदल चलने को नहीं बचती जगह : राजेश

राजेश ने कहा कि निर्माण सामग्री और वाहनों के पैदल रास्ते के सामने पार्क रहने से पैदल चलने के लिए लोग रास्ते तक पहुंच ही नहीं पाते। ऐसे में ये रास्ते सिर्फ निर्माण सामग्री को उतारने, जमा करने के साथ ही वाहनों को पार्क करने की जगह में बदल गए हैं।
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