पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी से जुड़े फोन टैपिंग मामले की जांच कर रही सीआईडी ने फोरेंसिक ब्यूरो की एक उप निदेशक और वैज्ञानिक अधिकारी समेत तीन लोगों से घंटों पूछताछ की। जांच अधिकारियों ने पहले से तैयार प्रश्नावली से एक-एक कर करीब दर्जन भर सवाल पूछे। इन सवालों के जवाब से निकले सवालों पर टीम फिर तीनों से पूछताछ कर सकती है। सोमवार को फोरेंसिक ब्यूरो धर्मशाला की उप निदेशक मीनाक्षी, जुन्गा स्थित लैब के वैज्ञानिक अधिकारी सुधीर और टेक्निकल सेल के एक कर्मचारी से यह पूछताछ की गई।
सूत्रों का कहना है कि तीनों कथित फोन टैपिंग मामले के दौरान सीआईडी मुख्यालय में दी गई दबिश के समय मौजूद थे। इन्होंने ही फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की थी। अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि दबिश से पहले तत्कालीन मुख्य सचिव के कमरे में एक गोपनीय बैठक भी हुई थी, जिसमें मीनाक्षी भी मौजूद थीं।
बताया जाता है कि इसी बैठक में दबिश के दौरान और उसके बाद के सभी अपडेट मुख्य सचिव कार्यालय को देने के लिए कहा गया था। डीआईजी बिमल गुप्ता की अध्यक्षता में गठित सीआईडी की जो एसआईटी मामले की जांच कर रही है, उसे जांच देने से पहले शिमला पुलिस ने इसे बंद करने की तैयारी कर ली थी। बेहद गोपनीय तरीके से एसपी शिमला को जानकारी दिए बिना स्थानीय पुलिस और पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कैंसलेशन रिपोर्ट तैयार कराई और कोर्ट भेज दी। संजय कुंडू के डीजीपी का पदभार संभालने के बाद भंडारी ने मामले में जांच तेज करने की गुजारिश की तो रिव्यू के दौरान अधिकारियों के खेल का पता चला। कुंडू ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी। मामले में पूर्व मुख्य सचिव के अलावा कई पूर्व व वर्तमान आईपीएस अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं, जिनमें पूर्व डीजीपी बी कमल कुमार और सीताराम मरडी भी शामिल हैं।