अधिवक्ता विनय शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका में बताया गया है कि 7 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किए गए अनुराग शर्मा ने नामांकन के साथ जमा किए गए हलफनामे में अपनी सभी संपत्तियों की पूरी जानकारी नहीं दी है। आरोप लगाया गया है कि नामांकन दाखिल करते समय अनुराग सरकारी ठेकेदार के रूप में भी काम कर रहे थे। उनके नाम पर लोक निर्माण विभाग के करोड़ों के ठेके चल रहे थे, जिनके काम जारी थे। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9 ए के अनुसार अगर किसी व्यक्ति का सरकार के साथ सक्रिय अनुबंध होता है, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है। अगर कोई उम्मीदवार जानबूझकर जानकारी छिपाता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाता है। याचिकाकर्ता ने मामले में चुनाव आयोग, राज्यसभा सचिवालय, विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर और सांसद अनुराग को पार्टी बनाया है।