एसोसिएशन ने कहा कि वित्तीय संकट का बहाना केवल पेंशनरों के अधिकारों को दबाने के लिए किया जा रहा है। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रधान एवं हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर ने की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की पेंशन में एकमुश्त भारी बढ़ोतरी करना सरकार की दोहरी नीति को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता वर्ग के वेतन-भत्ते बढ़ाने के लिए धन है, लेकिन पेंशनरों के लिए नहीं। सुरेश ठाकुर ने कहा कि 28 नवंबर 2025 को धर्मशाला में हुए ऐतिहासिक धरने के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन आज तक पूरे नहीं किए गए हैं। इससे सरकार की कथनी और करनी का अंतर साफ हो गया है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 20 दिनों के भीतर पेंशनरों के शिष्टमंडल को बुलाकर ठोस निर्णय नहीं लिए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री से मांग की गई कि हिमाचल दिवस पर कम से कम दो लंबित डीए किस्तों की घोषणा की जाए और लंबित चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए तुरंत राशि जारी की जाए। इसके अलावा विभिन्न विभागों और निगमों के पेंशनरों की लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की भी मांग रखी गई। बैठक में जेएन निराला, हर्मेश राणा, गंगा राम शर्मा, चेत राम वर्मा, मोहन नेगी, ओम लाल चौहान सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।