एचआरटीसी मुख्यालय में गरजे पेंशनर्स
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एचआरटीसी पेंशनर्स की मांगों को लेकर प्रदेश सरकार और निगम प्रबंधन के उदासीन रवैये के खिलाफ आठ जून को निगम के करीब 7,000 पेंशनर प्रदेश सचिवालय का घेराव करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिमाचल दौरे के समय भी पेंशनर अपनी मांगें उनके समाने उठाएंगे। गुरुवार को शिमला में एचआरटीसी मुख्यालय के बाहर धरना देने के बाद एचआरटीसी पेंशनर्स कल्याण संगठन ने यह एलान किया। सुबह करीब 11:30 बजे से दोपहर बाद 3:00 बजे तक निगम के करीब 1,500 पेंशनरों ने धरना दिया। सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति ने भी पेंशनरों के आंदोलन को समर्थन का एलान किया है। ऐसे में निगम के 13,000 सेवारत और 7,000 सेवानिवृत्त सहित 20,000 कर्मियों के मांगों को लेकर एक मंच पर आने की संभावना है।
संगठन के प्रधान सत्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि निगम प्रशासन और सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने सरकार को चेताया कि पेंशनरों की अनदेखी विधानसभा चुनाव में सरकार पर भारी पड़ेगी। सरकार की उपेक्षा के कारण पेंशनरों का शोषण हो रहा है और वरिष्ठ नागरिकों को आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। एचआरटीसी पर पेंशनरों की 350 करोड़ों की वित्तीय देनदारियां लंबित हैं। संगठन के अध्यक्ष केसी चौहान के अलावा प्रदेश भर से आए पेंशनर प्रतिनिधियों ने धरने को संबोधित किया।
पेंशनरों की मुख्य मांगें
- महीने के पहले हफ्ते में जारी हो पेंशन
- मेडिकल बिलों का समय पर हो भुगतान
- पांच, 10 और 15 फीसदी पेंशन वृद्धि का लाभ जारी हो
- 2015 से ग्रेच्युटी सहित अन्य भत्तों का हो भुगतान
झलकियां
धरने में सेवानिवृत्त मुख्य महाप्रबंधक, मंडलीय प्रबंधक, क्षेत्रीय प्रबंधकों ने भी लगाए नारे
- लोकल डिपो के चालकों-परिचालकों का तालियों से किया स्वागत
- बिस्किट की रिफ्रेशमेंट, बोतल बंद पानी का भी बंदोबस्त
- पंडाल में जगह नहीं मिली तो इलेक्ट्रिक बसों के भीतर बैठ गए पेंशनर
- बिजली गई तो बैटरी वाले माइक से जारी रखा संबोधन