हाल ही में निर्वासित तिब्बत सरकार (केंद्रीय तिब्बती प्रशासन) के चुनाव संपन्न हुए थे। इन चुनावों में दुनिया भर में बसे तिब्बतियों ने पेंपा सेरिंग को अपना प्रधानमंत्री (सिक्योंग) चुना, लेकिन मुख्य न्यायाधीश सहित दो अन्य न्यायाधीशों को पद से बर्खास्त किए जाने से सांविधानिक संकट पैदा हो गया था। इस तिब्बती सांविधानिक संकट के समाधान के लिए 24 मई को निर्वासित तिब्बत संसद का अतिरिक्त सत्र बुलाया गया।
इसके बाद निर्वासित तिब्बत संसद की ओर से 25 मार्च को बर्खास्त किए गए तिब्बत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सोनम नोरबू समेत दो अन्य न्यायाधीश जनता और सांसदों की अपील के बाद काम पर लौट आए थे। तभी शपथ ग्रहण समारोह के मार्ग में आ रहा गतिरोध टल सका था।कर्नाटक में हुआ है पेंपा सेरिंग का जन्म पेंपा सेरिंग का जन्म कर्नाटक में रिफ्यूजी सेटलमेंट में हुआ था। वे निर्वासित तिब्बत संसद में दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं। अमेरिका में दलाईलामा के प्रतिनिधि पद पर तैनात रहे हैं। उन्होंने पिछली बार भी प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ा था, जिसमें वह दूसरे नंबर पर रहे थे। सेरिंग करीब 20 वर्षों से निर्वासित तिब्बत सरकार में कई पदों पर काम करते रहे हैं।
वर्ष 1960 से निर्वासित तिब्बत सरकार भारत में लोकतांत्रित रूप से कार्य कर रही है। वर्ष 2001 तक धर्मगुरु दलाईलामा ही निर्वासित तिब्बत सरकार का प्रधानमंत्री चुनते थे। वर्ष 2001 में पहली बार प्रधानमंत्री पद के लिए सीधे चुनाव करवाए गए। वर्ष 2011 में दलाईलामा ने अपनी राजनीतिक शक्तियों का हस्तांरण निर्वासित प्रधानमंत्री को कर दिया था। वर्ष 2001 से सीधे चुनाव से चुने जाने वाले पेंपा सेरिंग तीसरे प्रधानमंत्री हैं। वर्ष 2001 से 2011 तक सामदोंग रिंपोंछे सीधे चुनाव से प्रधानमंत्री बने थे। 2011 से 2021 तक डा. लोबसंग सांग्ये प्रधानमंत्री रहे। अब पेंपा सेरिंग सीधे चुनाव से चुने जाने वाले तीसरे प्रधानमंत्री बने हैं।
केंद्रीय तिब्बत प्रशासन का अध्यक्ष ही प्रधानमंत्री
केंद्रीय तिब्बत प्रशासन निर्वासित तिब्बत सरकार का मुख्यालय धर्मशाला में है। इसे सरकार का सीधा नाम नहीं दिया गया है। निर्वासित तिब्बत सरकार को आधिकारिक नाम केंद्रीय तिब्बत प्रशासन दिया गया है। केंद्रीय तिब्बत प्रशासन के अध्यक्ष को ही प्रधानमंत्री कहा जाता है। पूरी दुनिया भर में किसी भी देश ने निर्वासित तिब्बत सरकार को मान्यता नहीं दी है। धर्मशाला में निर्वासित तिब्बत सरकार की संसद का भवन भी बना है। इसके अलावा इनका सुप्रीम कोर्ट का भवन भी है। प्रधानमंत्री का दफ्तर भी धर्मशाला में है।