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Himachal: पवन चक्की के ब्लेड से बना सकेंगे ग्लास फाइबर, गाड़ियों के इंटीरियर, आईआईटी मंडी को मिली सफलता

संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Fri, 07 Oct 2022 03:46 PM IST

सार

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले पवन चक्की के ब्लेड के कचरे को रिसाइकल कर ग्लास फाइबर (प्लास्टिक) बनाने में सफलता हासिल की है। 
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आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं की टीम। - फोटो : संवाद


भारत पवन बिजली संयंत्र लगाने में चौथे स्थान पर

आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ मेकेनिकल एंड मैटीरियल्स इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सनी जफर और केमिकल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वेंकट कृष्णन ने इस शोध का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि भारत पवन बिजली संयंत्र लगाने में चौथे स्थान पर है। हवा से बिजली तैयार करने के दृष्टिकोण से देश के अहम क्षेत्रों में विंड टर्बाइन (विंडमिल्स) लगाए जाते हैं, लेकिन विंड मिल के ब्लेड को रिसाइकल करने की कोई विधि नहीं थी। 


पवन चक्की के ब्लेड के निस्तारण से फैल रहा प्रदूषण

शोधार्थी प्रियंका और मनजीत ने बताया कि पूरी दुनिया में पवन बिजली जैसी अक्षय ऊर्जा अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा से होने वाले नुकसान कम हों, लेकिन पवन चक्की के ब्लेड का निस्तारण करने से पर्यावरण में प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। पवन चक्की के ब्लेड पॉलिमर कंपोजिट से बने होते हैं। इस पॉलिमर सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए कार्बन फाइबर और ग्लास फाइबर इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें नष्ट करने के लिए या तो जमीन में गाड़ दिया जाता है या फिर जला दिया जाता है, लेकिन कचरा निपटाने के दोनों तरीके पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ाते हैं और खर्चीले हैं।


सिरके का किया गया प्रयोग

रिसाइकल प्रोसेस में सिरका अहम भूमिका निभाएगा। डॉ. सनी जफर ने कहा कि इसमें हाइड्रोजन पेरोक्साइड और एसिटिक एसिड के साथ जीएफआरपी कंपोजिट के रासायनिक अपघटन में माइक्रोवेव का उपयोग किया है। हाइड्रोजन पेरोक्साइड और एसिटिक एसिड दोनों पर्यावरण के लिए स्वच्छ रसायन हैं। पहले का उपयोग व्यापक स्तर पर कीटाणुनाशक/ एंटीबायोटिक के रूप में होता है और दूसरा विनेगर सिरका है।

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