नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर के महंत गोकुला नंद आजकल कुनिहार आए हुए हैं। उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। महंत गोकुल नंद ने वर्ष 1998 में कुनिहार की शिव तांडव गुफा में तपस्या की थी और लगातार 31 दिन तक निराहार रहे थे। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। महंत निर्मल अखाड़ा गोकुलानंद महाराज का कुनिहार पहुंचने पर लोगों ने भव्य स्वागत किया।
हाटकोट के प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर में उन्होंने विशेष बातचीत की। कहा कि 2001 में अखाड़ा परिषद साधु समाज में सक्रिय रूप से कार्य किया। इसके पश्चात कई तीर्थ करते हुए नेपाल पहुंचे। वहां पर एक संन्यासिन माता ने उन्हें धर्म पुत्र बनाया। उन्हें नेपाल के नेपालगंज नामक स्थान में लक्ष्मीनारायण मंदिर में धर्म माता के आशीर्वाद से सेवा का सौभाग्य मिला है और वहां डीएम ने यह स्थान उनके नाम कर दिया है।
वर्ष 2009 से नेपाल के विश्व प्रसिद्ध पशुपति नाथ धाम में सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है और मंदिर के दक्षिण द्वार का उन्हें महंत नियुक्त किया गया। उन्हें पशुपति नाथ जी की पिंडी के शृंगार के लिए चंदन व माल्यार्पण का सौभाग्य मिल रहा है। गोकुला नंद ने बताया कि पशुपतिनाथ धाम में कोई भी पशुबलि का विरोध नहीं कर सकता।
इस धाम को विश्व के एक मात्र तंत्र पीठ के रूप में भी जाना जाता है। पूर्णमासी पर नागमणि, एकमुखी रुद्राक्ष जैसी दुर्लभ चीजों से पशुपति नाथ जी की शृंगार सामग्री के दर्शन सभी भक्तों को हो जाते हैं और इसी दिन पांच पशुओं की बलि भी दी जाती है। इस दिन इस धाम में 6 क्विंटल चावल का भोग लगाते हैं।
पिंडी से एक धागा या रस्सी बांधकर पशुबलि वाले स्थान तक ले जाया जाता है। इस तंत्र पीठ में दूध, दही, शहद व पानी को बड़े पात्रों में भरा जाता है। सभी भक्तों को प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है।
इस अवसर पर ठाकुरद्वारा मंदिर में गोकुला नंद जी के स्वागत के लिए तारा चंद शर्मा, शिव दत्त जोशी, राधा रमन शर्मा, राजीव शर्मा, राजेंद्र धवन, अनिल शर्मा, निर्मला शर्मा, गीता शर्मा, प्रभा भारद्वाज सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।