बड़ा भंगाल में मवेशियों के साथ फंसे लोगों को बाहर निकालने में हो रही देरी पर घुमंतू पशुपालक भड़क गए हैं। हिमाचल घुमंतू पशुपालक महासभा ने एलान किया है कि प्रशासन की अनदेखी हद से पार हो गई है। अब वे अपने स्तर पर बर्फ में फंसे लोगों और मवेशियों को निकालने का प्रयास करेगी।
इस दौरान किसी व्यक्ति की मौत होती है या फिर उनके पशु मौत का ग्रास बनते हैं तो मृतक व्यक्ति का दाह संस्कार डीसी कार्यालय के बाहर किया जाएगा। मवेशी के शव को डीसी कार्यालय प्रांगण में दफनाया जाएगा। यह बात वीरवार को हिमाचल घुमंतू पशुपालक महासभा के अध्यक्ष राज कुमार भट्ट ने धर्मशाला में कही।
उन्होंने जिला प्रशासन के बचाव कार्यों पर रोष जताते हुए कहा कि प्रशासन मात्र बड़ा-भंगाल को ही गिनती में ले रहा है, जबकि इसके आसपास भी करीब 40 डेरे पशुपालकों ने जमाए हुए हैं, जिनके बचाव के लिए जिला प्रशासन कोई उचित कदम नहीं उठा रहा है।
इन डेरों में 15-20 हजार भेड़-बकरियां, जबकि विशेष नस्ल के 300 के करीब घोड़े शामिल हैं। इन्हें बचाने के लिए जिला प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा है। वहीं, फंसे हुए लोगों के परिजनों से भी जिला प्रशासन ने आज दिन तक संपर्क नहीं साधा है।
उन्होंने आपदा प्रबंधन के रेस्क्यू अभियानों पर भी प्रश्नचिह्न लगाया। इससे पहले उन्होंने एसी टू डीसी कांगड़ा बीके चौधरी को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने कहा कि बड़ा भंगाल के विभिन्न डेरों में फंसे लोगों को निकलवाने के लिए पर्वतारोहियों की टीम की सहायता से थमसरजोत से इन पशु पालकों को माल-मवेशियों के साथ सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की जाए।
इसके अलावा मृत पशुपालक राकेश कुमार के शव को खोजकर उसे उसके परिजनों के हवाले किया जाए। वहीं भारी बारिश और बर्फबारी के कारण जिन-जिन पशुपालकों का भारी जान-माल का नुक्सान हुआ है, उनको तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान करने के आदेश दिए जाएं।