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Shimla News: स्कूल चार्टर्ड बस सेवा में कटौती से अभिभावक परेशान

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एचआरटीसी ने ढली, संजौली से ताराहाल और सेंट एडवर्ड स्कूल के लिए चलाई जाने वाली बसें की बंद
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अभिभावक बोले-बच्चों को कैसे भेजेंगे स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के निजी स्कूलों के लिए चलने वाली एचआरटीसी की चार्टर्ड बसों की संख्या में इस बार कटौती की है। इस वजह से अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने की चिंता सता रही है।

ढली के हेलीपैड क्षेत्र में रहने वाले अभिभावक भी जब बस पास बनवाने के लिए संजौली काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें बताया कि उनके क्षेत्र से ताराहाल और सेंट एडवर्ड स्कूल के लिए चलाई जाने वाली बसें और टेंपो ट्रैवलर बंद कर दिए हैं। अब अभिभावक इस बात को लेकर परेशान हैं कि वह अपने बच्चों को कैसे स्कूल भेजेंगे। अभिभावकों ने इस बारे में क्षेत्रीय प्रबंधक से सोमवार को मिलकर अपनी समस्या के बारे में अवगत करवाया। अभिभावकों का कहना है कि उनके क्षेत्र से सुबह के समय कोई भी सीधी बस सेवा नहीं है, जिससे कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेज सकें।
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लोगों के मुताबिक दोनों स्कूलों के लिए सालों से एचआरटीसी परिवहन सेवा उपलब्ध करवा रहा था लेकिन इस साल अचानक बस और टेंपो ट्रैवलर को बंद कर दिया है। इस वजह से क्षेत्र के करीब 35 बच्चों के अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अभिभावकों ने बताया कि अगर बस सेवा शुरू नहीं होती है तो उन्हें संजौली और ढली से पैदल पहुंचकर बसों से बच्चों को स्कूल भेजना पड़ेगा। टैक्सी से बच्चों को भेजने में उन्हें कई गुना अधिक किराया चुकाना होगा जोकि उनके लिए मुमकिन नहीं है। इसको देखते हुए अभिभावकों ने एचआरटीसी और सरकार से स्कूलों के लिए पहले ही तरह की बस और टेंपो ट्रैवलर चलाने की मांग की है।



सीधी बस सेवा न होने से दिक्कत
हेलीपैड क्षेत्र से ताराहाल स्कूल के लिए एचआरटीसी परिवहन सुविधा उपलब्ध करवा रहा था लेकिन अब इसे बंद कर दिया है। ऐसा कोई विकल्प नहीं बचा है, जिससे हम बच्चों को सीधे स्कूल भेज सकें। मेरी दो बेटियां ताराहाल स्कूल में पढ़ती हैं। सरकार को अभिभावकों की इस परेशानी को देखते हुए चार्टर्ड बस की सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए।
-मनोज चौहान, अभिभावक



अभिभावकों की बढ़ गईं मुश्किलें
हेलीपैड क्षेत्र के बच्चे सालों से एचआरटीसी की परिवहन सुविधा का लाभ उठाकर स्कूल पहुंच रहे थे, लेकिन अब निगम ने यहां से बस और टेंपों ट्रैवलर चलाना बंद कर दिया है। इससे अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एचआरटीसी का कहना है कि संजौली और ढली से पास बनवा लीजिए। हमारे परिवार से दो बच्चे स्कूल जाते हैं। टैक्सी से बच्चों को भेजना पड़ा तो खर्च कई गुना बढ़ जाएगा।
-हरिंद्र चौहान, अभिभावक



टैक्सी से बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल
हमारे परिवार से तीन बच्चे स्कूल जाते हैं। सालों से बच्चे एचआरटीसी की बसों से स्कूल जा रहे थे। मध्यम वर्ग के परिवार के लिए टैक्सी से बच्चों को स्कूल भेजना मुमकिन नहीं है। सरकार को अभिभावकों की दिक्कतों का देखते हुए पहले की तरह की बस सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए।
-मंजना बाली, अभिभावक


लोगों नहीं मिल रही हैं सुविधा
शहर के दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों के पास एचआरटीसी बसों के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। इसको देखते हुए निगम को पहले दूरदराज के क्षेत्रों में सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए। शहर में लोगों के पास अन्य विकल्प भी हैं। एचआरटीसी स्टाफ की कमी बताकर बसों को नहीं चला रहा है। सरकार को इसमें हस्तक्षेप करके अतिरिक्त बसों का प्रावधान करना चाहिए।
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-राजन काल्टा, अभिभावक


निगम ने जताई असमर्थता

एचआरटीसी की सालों से चल रही स्कूल बस बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसको लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक से लोग मिलने गए थे लेकिन उन्होंने भी स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए बसों को चलाने में असमर्थता जताई है। निगम प्रबंधन को इसमें सकारात्मक कदम उठाते हुए बच्चों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवानी चाहिए।
-भूषण वर्मा, अभिभावक
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