इसके विरोध स्वरूप शुक्रवार को बच्चे की माता गांववासियों के साथ सुबह 8 बजे स्कूल पहुंचीं और स्कूल गेट पर धरने पर बैठ गईं। वह विधवा हैं तथा दिहाड़ी लगाकर बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने किसी भी लेट आने वाले कर्मचारी को स्कूल में नहीं घुसने दिया।
मुख्य अध्यापिका लगभग 9 बजे स्कूल पहुंचीं तो अभिभावकों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। बच्चे की पिटाई का कारण पूछा और आरोपी अध्यापक पर कार्रवाई की मांग की। इसकी लिखित शिकायत भी प्रिंसिपल को दी।
मामले में पहले तो स्कूल अध्यापक तथा प्रिंसिपल पल्ला झाड़ते रहे, लेकिन लोगों का आक्रोश बढ़ने लगा तो उन्होंने अध्यापक से माफी मंगवाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।
उधर, स्कूल प्रधानाचार्य नीलम कौशल ने ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें स्कूल के अंदर जाने दिया जाए, उसके बाद ही वह उचित कार्रवाई कर सकती हैं।
वहीं, उच्च शिक्षा उपनिदेशक धर्मशाला गुरदेव सिंह ने बताया कि मामला ध्यान में आया है। ऐसी घटना की जानकारी प्रधानाचार्य को पहले ही दी जानी चाहिए थी। एक-दो दिन में वह स्वयं मामले की जांच करेंगे।