पंकज बद्दी में नौकरी करता था। लॉकडाउन में घर आना पड़ा। घर बैठे-बैठे बोर हो रहे थे तो मन में विचार आया कि खिलौना गाड़ियां बनाई जाएं। सोचा और शुरू कर दिया नया काम। अभी तक कई गाड़ियां बना चुके हैं। देखने वाले दंग रह जाते हैं, क्योंकि ये खिलौना गाड़ियां असली वाहन से कम नहीं दिखतीं। हमीरपुर जिला की पंचायत ग्वारडू के गांव कुसवाड़ के पंकज कुमार के हाथों में ऐसी कला है कि कागज, लकड़ी के साथ बनाए गए वाहनों को देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता है कि यह असली हैं या नकली। पंकज ने अपने आंगन में ही मिनी बस अड्डा बनाकर एचआरटीसी की बसों को स्थान दिया है। उसने अपने हाथों से ट्राला, टैंकर, टिपर, ट्रैक्टर, घर, मंदिर भी बनाए हुए हैं।