मामले में बीते वीरवार को विजिलेंस टीम ने राज्य सचिवालय में दबिश दी थी। तीन सदस्यीय टीम ने राजस्व विभाग की शाखा में जाकर रिकॉर्ड मांगा। इससे पहले भी टीम एक बार सचिवालय में दबिश दे चुकी है।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में अब तक जुटाए गए रिकॉर्ड में यह बात सामने आई है कि जमीन खरीदने में धारा 118 की मंजूरी देने के पैसों का लेनदेन होता रहा है।
जांच के अनुसार अकेले वर्ष 2010 में ही राजस्व विभाग ने ढाई सौ से ज्यादा मामलों में धारा 118 के तहत अनुमति दे दी। धारा 118 के तहत जमीन खरीद पर अवैध वसूली मामले में सचिवालय में राजस्व विभाग के कर्मचारी परेशान हैं।
वे इस शाखा में काम करना नहीं चाहते। कर्मचारियों का मानना है कि जब डीसी से 118 की फाइल आती है तो शाखा के कर्मचारी इसे सरकार के समक्ष रखते हैं। छोटे से लेकर बड़े अफसर तक फाइल जाती है। ऐसे में कर्मचारियों से पूछताछ करना ठीक नहीं है।