उन्हें भगवान जगन्नाथ नाम के पटके भी पहनाए। पूजा अर्चना के बाद समुदाय के लोग मस्जिदों में जुमे की नमाज अता करने रवाना हुए। नसीम मोहम्मद दीदान ने बताया कि ऐतिहासिक शहर नाहन में हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सद्भावना की मिसाल पेश करते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम मुस्लिम कैलेंडर की 10 तारीख हजरत हुसैन की याद को ताजा करती है। जो अत्याचारी शासक के खिलाफ नैतिकता व इंसाफ की लड़ाई लड़ते हुए अपने परिवार के 72 सदस्यों के साथ शहीद हो गए थे।
वहीं भगवान विष्णु मानव पर परोपकार का उपदेश देते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग भी हर साल भगवान वामन की पालकी का गर्मजोशी से स्वागत करते आ रहे हैं।