तीन साल से गांव की इस पाठशाला में टीजीटी आर्ट्स और टीजीटी साइंस अध्यापक के पद खाली चल रहे हैं। लाहौल घाटी के कई स्कूलों में अध्यापकों की कमी के चलते शिक्षा की हालात बिगड़ गई है। यही वजह है कि 80 फीसदी बच्चे साइंस पढ़ने के लिए जिला से बाहर के स्कूलों में अध्ययनरत हैं।
समाज सेवक सुख राम और राम सिंह ने प्रधान अरविंद कटोच के इस नेक कार्यो को सराहा है। राम सिंह का कहना है सरकार गुणवत्तापरक शिक्षा के दावे तो करती है लेकिन धरातल पर हालात ठीक उलट हैं।
सरकार ने लाहौल घाटी के 11 स्कूलों में विज्ञान संकाय स्वीकृत कर रखे हैं। लेकिन रावमापा केलांग, उदयपुर और जाहलमां में ही साइंस की क्लासें चल रही हैं। उक्त पाठशाला में भी स्टाफ की कमी चल रही है।
शिक्षा उपनिदेशक लाहौल प्रेमनाथ परशीरा ने कहा कि हर माह अध्यापकों के रिक्त पदों का ब्यौरा सरकार को भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रधान द्वारा बच्चों को स्वैच्छिक रूप से पढ़ाया जाना सराहनीय कार्य है।