हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव में एक और अड़ंगा खड़ा हो गया है। इन चुनाव पर एक जिला परिषद वार्ड भारी पड़ गया है। इसकी पुनर्सीमांकन प्रक्रिया के लंबा खींचे जाने से पंचायतों के दूसरे चरण के चुनाव जनवरी तक सरक रहे हैं। इस वार्ड की पुनर्सीमांकन प्रक्रिया दो दिसंबर तक ही पूरी हो पाएगी।
इसके पूरा होने के बाद ही पंचायती राज विभाग राज्य चुनाव आयोग को तैयारियां पूरी होने की सूचना दे सकेगा। अगर दिसंबर के प्रथम सप्ताह में चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचना जारी की जाती है तो जनवरी में ही पंचायत चुनाव हो पाएंगे।
पंचायत चुनाव में यह देरी जिला शिमला के टिक्कर वार्ड में हो रही है। इस वार्ड में पहले आठ पंचायतें जुब्बल-कोटखाई की थीं और सात पंचायतें रोहडू़ की थीं। सात पंचायतों के बावजूद रोहडू़ में यह नया वार्ड बनाया गया। जो आठ पंचायतें जुब्बल-कोटखाई की थीं, उनमें से कोटखाई तहसील के थरोला वार्ड में तीन पंचायतें और जयपीड़ी वार्ड में पांच पंचायतें डाली गईं।
इसके खिलाफ मंडलायुक्त के पास एक अपील हुई। इस पर मंडलायुक्त ने नौ सितंबर को फैसला दिया कि सही प्रोसीजर अपनाकर ही यह पुनर्सीमांकन हो। फिर 15 अक्तूबर को थरोला की सात पंचायतें और टिक्कर की आठ पंचायतों को आपस में मिलाकर नए सिरे टिक्कर की वार्डबंदी की गई। फिर से मंडलायुक्त के पास दो अपीलें सुशांत देष्टा और रितेश कपरेट ने कीं। इन दोनों में भौगोलिकता को ध्यान में नहीं रखने की शिकायत की गई।
इन पर मंडलायुक्त ने उपायुक्त के आदेश छह नवंबर को सेट एसाइड किए। अब तीसरी बार उपायुक्त कार्यालय ने नया ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें फिर से वार्डबंदी की गई है। इसमें छह नवंबर को ही टिक्कर क्षेत्र की आठ पंचायतों में से थरोला वार्ड की नौ पंचायतें मिलाने का ड्राफ्ट बनाया गया है।
अब मंडलायुक्त के पास अपील का एक दिसंबर तक का समय है। उपायुक्त के पास दो दिसंबर को अंतिम अधिसूचना होगी। इसके बाद ही पंचायती राज विभाग चुनाव आयोग को खुद के चुनाव के लिए तैयार होने की जानकारी दे सकेगा। अधिसूचना अगर दो दिसंबर के बाद जारी होती है, तो मतदान की तिथि को चुनाव आयोग को कम से कम 26 कार्यदिवस देने होंगे। ऐसे में ये चुनाव जनवरी के दूसरे सप्ताह तक ही हो पाएंगे।
अधिसूचना जारी होने के बाद मतदान की तिथि तक कम से कम 26 दिन का समय देना होता है। जिला परिषद वार्ड के पुनर्सीमांकन के बारे में कुछ नहीं बता पाएंगे। कानून की व्याख्या करने का काम आयोग का नहीं है।
- टीजी नेगी, आयुक्त, हिमाचल प्रदेश निर्वाचन आयोग