प्रदेश में दिसंबर माह से स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा। प्रदेश के पांच स्कूलों को स्मार्ट स्कूल के लिए चयनित किया गया है। पांच स्कूलों में दिसंबर से स्मार्ट स्कूल की सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। आईएल एंड एफएस/एजूकेशन कंपनी ने सभी स्कूलों में संबंधित सामग्री पहुंचा दी है।
अगस्त माह में कंपनी को 120 दिन के भीतर लैब स्थापित करने का लक्ष्य मिला था। जिसे कंपनी ने पूरा कर लिया है। चयनित पांच स्कूलों में दो स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए हैं। जिनमें 40-40 कंप्यूटर स्थापित किए गए हैं। इन स्कूलों में एक साथ 80 छात्र आनॅलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। छात्र देश के किसी भी बेहतर अध्यापक से ऑनलाइन प्रश्न पूछ सकेंगे।
इसके साथ ही अध्यापक भी अध्यापन में आ रही समस्याओं का हल देश के बेहतर अध्यापकों से पा सकेंगे। स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट के तहत नवमी से लेकर बारहवीं तक के सभी छात्रों व अध्यापकों की अपनी ईमेल आईडी बनाई जाएगी। हर सवाल का जवाब संबंधित छात्र व अध्यापक को उसकी मेलआईडी पर उपलब्ध होगा।
छात्रों को इच्छानुसार देश के बेहतर अध्यापकों का लेक्चर भी मिलेगा। संबंधित अध्यापक की मेलआईडी पर संबंधित आग्रह भेजना होगा। आग्रह के सात दिन के भीतर उस अध्यापक का लेक्चर ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगा। छात्रों को पढ़ाई में आ रही समस्या अब ऑनलाइन हल होगी।
यह पांच स्कूल बनेंगे स्मार्ट स्कूल- प्रदेश भर से पांच स्कूलों को स्मार्ट स्कूल के लिए चयनित किया गया है। जिसमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लालपानी (शिमला), राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला करसोग (मंडी), राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रेहन(कांगड़ा), राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कन्या घुमारवीं(बिलासपुर) तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल हमीरपुर को शामिल किया गया है।
प्रदेश में पांच स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाया जा रहा है। संबंधित कंपनी ने कार्य पूरा कर दिया है। दिसंबर माह से स्मार्ट स्कूल की सुविधा शुरू हो जाएगी।
धनश्याम चंद, राज्य प्रोजेक्ट डायरेक्टर एसएसए