हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनाव में मताधिकार का प्रयोग करने वाले 54 लाख से अधिक मतदाताओं की उंगली में मैसूर की स्याही लगेगी। राज्य चुनाव आयोग ने स्याही की तीस हजार शीशियां खरीदीं हैं। आयोग ने पांच मिलीलीटर स्याही की शीशी 87 रुपये में खरीदी है। पिछले चुनाव के लिए 5 मिलीलीटर की शीशी 50 रुपये के हिसाब से स्याही खरीदी थी।
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार पिछले पांच साल के दौरान चांदी के दाम बढ़ने के कारण महंगे दाम पर स्याही खरीदनी पड़ी है। मतदाताओं की उंगली में लगाई जाने वाली खास स्याही में चांदी का इस्तेमाल भी किया जाता है।
प्रदेश में बर्फ से प्रभावित होने वाले जनजातीय जिलों किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के लिए स्याही की एक हजार शीशियों की व्यवस्था पहले ही कर दी गई थी। इन क्षेत्रों के लिए कंपनी से शीशियां भेज दी गई हैं। इसके अलावा कर्नाटक के मैसूर से स्याही की 29 हजार शीशियां ट्रांसपोर्ट से हिमाचल भेजी गई हैं। इसके बाद इन्हें चुनाव सामग्री से साथ विभिन्न जिलों में भेजा गया है।
मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड कंपनी बनाती है स्याही
कर्नाटक सरकार की मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड कंपनी देश की एकमात्र ऐसी कंपनी है, जो मतदान के बाद वोटरों की उंगली में लगाई जाने वाली स्याही का उत्पादन करती है। साल 1962 में पहली बार चुनाव में इसका इस्तेमाल किया गया था। दो हफ्ते से पहले यह स्याही नहीं मिटती है। यह कंपनी चुनाव में इस्तेमाल होने वाली स्याही का विदेशों में भी निर्यात करती है।