प्रदेश के महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी साहित्यकार पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम की 11 जुलाई शुक्रवार को जयंती थ्ाी। हर साल भाषा एवं संस्कृति विभाग एक सम्मेलन करवाकर बाबा कांशी राम को श्रद्धांजलि देता है।
बावजूद इसके बाबा को आज दिन तक वह स्थान नहीं पाया, जिसके वे हकदार थे। आजादी के इतने साल बीतने के बाद भी प्रदेश में कोई भी सरकार रही हो, बाबा कांशी राम को उचित स्थान नहीं दिला पाई हैं। इस कारण बाबा कांशी राम के परिवार में रोष व्याप्त है।
घोषणाएं कीं लेकिन अमल नहीं
बाबा कांशी राम के पोते विनोद शर्मा का कहना है कि बाबा को उचित सम्मान के लिए कई नेताओं ने कई घोषणाएं कीं। वे सब घोषणाओं तक ही समीति रह गईं। उन्होंने अमर उजाला से अपने विचार साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में भाषा एवं संस्कृति विभाग के कर्मचारी उनके घर आए थे और उन्होंने बताया था कि विभाग बाबा के स्लेटपोश मकान का अधिग्रहण करना चाहता है। परिवार वालों ने इसके लिए हामी भर दी।
उसके बाद कुछ नहीं हुआ। बाबा का स्लेटपोश मकान ढह कर खंडहर बन चुका है। इसी तरह छह-सात साल पहले तक धर्मशाला स्थित पुराने संस्कृति सदन को पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम के नाम से जाना जाता था।
नये भवन के शिलान्यास पर भी बाबा का नाम अंकित था। जब नए भवन का उद्घाटन हुआ तो बाबा कांशी राम का नाम हटा दिया गया था। इसके बाद बाबा के परिवार और गुरनवाड़ वासियों में खासा रोष फैल गया।
अनदेखी पर लोगों में नाराजगी
कई बार राजनेताओं ने बाबा का स्मारक बनाने की घोषणा की तो किसी ने बाबा के मकान का अधिग्रहण करने की बात कही, मगर यह सब कुछ घोषणाओं तक ही सीमित रहा। नेताओं की राजनीति के चलते गुरनवाड़ के लोग आज भी नाराज हैं।
इनका कहना है कि नेता स्वतंत्रता सेनानियों के नाम की झूठी घोषणाएं कैसे कर देते हैं। मात्र सीनियर सेकेंडरी स्कूल डाडासीबा बाबा के नाम से है।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जी जान से लड़े
बाबा कांशी राम का जन्म 11 जुलाई 1882 को डाडासीबा के गुरनबाड़ को हुआ था। उनके पिता का नाम लखनु राम और माता का नाम रेवती देवी था। उनके पिता लखनु राम का देहांत 1893 में ही हो गया था।
माता का देहांत भी अगले साल 1894 में हो गया। अंग्रेजी हुकूमत की यातनाओं को सहर्ष सहते हुए बाबा कांशी राम 15 अक्तूबर 1943 को स्वतंत्रता संग्राम की अमर ज्योति में विलीन हुए। बाबा के सम्मान में 23 अप्रैल 1984 को ज्वालामुखी में देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बाबा कांशी राम पर डाक टिकट का विमोचन किया था।